प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना (PMGSY) के चौथे चरण में टेंडर के लिए लोक निर्माण विभाग ने तीन शर्ते लगा दी है। योजना के पहले, दूसरे और तीसरे चरण के कार्यों को पूरा न करने वाले ठेकेदारों या फर्म को चौथे चरण के लिए योग्य नहीं होने की पहली शर्त है। दूसरी शर्त के तहत किसी को भी सात से ज्यादा काम नहीं दिए जाएंगे, जबकि तीसरी शर्त के मुताबिक एक ठेकेदार या फर्म को 100 करोड़ से अधिक के काम नहीं दिए जाएंगे।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने विभाग की ओर से लगाई गई इन कंडीशनज को लेकर यह खुलासा किया है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत प्रदेश में होने वाले कार्यों के लिए किसी फर्म या ठेकेदार का टेंडर के लिए तीन योग्यताएं रखी गई है। उन्होंने कहा कि योजना के पहले, दूसरे और तीसरे चरण के तहत जिन ठेकेदारों या फर्म ने काम पूरे नहीं किए है, वह चौथे चरण के लिए योग्य नहीं होंगे।
कार्यों को तय समयावधि में पूरा करने के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी की है, जिसमें कड़े निर्देश दिए गए है कि कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही योजना के तहत होने वाले कार्यों के लिए तय मापदंडों की समय-समय पर जांच के लिए दिल्ली से इंस्पेक्शन टीम को बुलाया जाए और कार्य की गुणवता सही न पाए जाने पर संबंधित फर्म या ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश दिए गए है। विभाग को निर्देश दिए है कि एक ठेकेदार या फर्म को सात से अधिक टेंडर और 100 करोड़ से उपर के काम न दिए जाएं। कार्यों की गुणवता देने वाले आगे आए और यह समय पर पूरे हो, इसके लिए यह कदम उठाए गए है।
हिमाचल में 2300 करोड़ से 1500 सडक़ों का होगा निर्माण।
प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका होगा, जब एक वित वर्ष में 2300 करोड़ की लागत से 1500 किलोमीटर सडक़ें बनाने जा रहे है। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत बनने वाली इन 294 सडक़ों के लिए डीएनआईटी अप्रूवल हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में 15 अप्रैल तक इन सभी सडक़ों के निर्माण कार्य आरंभ हो जाएंगे।
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