हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांग कर्मचारियों के तबादलों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण के मामलों में रियायत पाने के लिए अब 60 फीसदी के बजाय 40 फीसदी दिव्यांगता को ही आधार माना जाएगा। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016 के तहत 40 फीसदी दिव्यांगता को बेंचमार्क माना गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार के 2013 के ज्ञापन में लिखी 60 फीसदी की शर्त को अब अधिनियम के अनुसार 40 फीसदी ही पढ़ा जाना चाहिए।
कोर्ट ने पूर्व के एक फैसले सीडब्ल्यूपी नंबर 6306/ 2024 का हवाला दिया, जिसे विभाग पहले ही स्वीकार कर चुका है। हाईकोर्ट ने विभाग के पुराने आदेश 22 मई 2025 को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर 40 फीसदी दिव्यांगता के मानक को ध्यान में रखते हुए दोबारा विचार करें। अदालत ने कहा कि सात दिनों के भीतर एक तर्कसंगत आदेश पारित किया जाए। साथ ही याचिकाकर्ता को दो दिनों के भीतर अपनी पसंद के स्टेशनों का विकल्प देने की छूट दी गई है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दिव्यांगता के आधार पर किसी कर्मचारी को एक ही स्थान पर जमे रहने का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। यह मामला सुशील बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता रामपुर के एक स्कूल में शास्त्री अध्यापक हैं। उन्होंने अपने तबादले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता 40 फीसदी से अधिक दिव्यांग हैं और उन्होंने अपनी शारीरिक स्थिति के आधार पर रामपुर के पास ही किसी स्कूल में नियुक्ति की मांग की थी।
शिक्षा विभाग ने याचिकाकर्ता की अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि राज्य सरकार की 2013 की स्थानांतरण नीति के अनुसार केवल 60 फीसदी या उससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारियों को ही स्थानांतरण में रियायत दी जा सकती है।
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