Hemorrhagic septicemia (HS) बीमारी किस एजेंट के कारण होती है?

Hemorrhagic septicemia

झारखंड के जमशेदपुर जूलॉजिकल पार्क में संदिग्ध हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया (HS) की वजह से दस काले हिरणों की मौत हो गई। हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया (HS) को पेस्टुरेलोसिस भी कहा जाता है और यह पेस्टुरेला मल्टीसिडा बैक्टीरिया से होता है। यह मुख्य रूप से गायों और भैंसों को प्रभावित करता है, जिसमें छोटे जानवर ज़्यादा कमज़ोर होते हैं। यह बैक्टीरिया नमी और पानी भरे हालात में ज़्यादा समय तक ज़िंदा रहता है। यह दूषित खाने, पानी, हवा और सीधे संपर्क से फैलता है।

Hemorrhagic septicemia
Hemorrhagic septicemia

हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया (Hemorrhagic Septicemia) मुख्य रूप से गाय और भैंस में होने वाली एक घातक जीवाणु जनित बीमारी है, जिसे गलघोंटू भी कहते हैं, जो Pasteurella multocida बैक्टीरिया से फैलती है और मानसून के मौसम में आम होती है; इसके लक्षणों में तेज बुखार, लार, सूजन और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं और इससे बचने का मुख्य उपाय मानसून से पहले टीकाकरण और पशुओं को अलग रखना है, जबकि मछलियों में भी इसी नाम का एक घातक वायरल रोग होता है, जो इंसानों के लिए हानिकारक नहीं है, पर मछली पालन के लिए खतरा है। 

पशुओं में हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया (गलघोंटू) 

    • कारक: 

      Pasteurella multocida नामक जीवाणु (बैक्टीरिया)। 

  • प्रभावित पशु: 

    गाय और भैंस (भैंस अधिक संवेदनशील)। 

  • अन्य नाम: 

    घूरखा, घोंटुआ, अषढ़िया, डकहा। 

  • लक्षण: 

    तेज बुखार, भूख न लगना, दूध कम देना, मुंह से लार और नाक से स्राव, गर्दन में सूजन, सांस लेने में कठिनाई, 1-2 दिन में मृत्यु। 

  • फैलाव: 

    दूषित चारा, पानी, संक्रमित पशु के संपर्क से। 

  • बचाव:

    मानसून से पहले टीकाकरण (अक्टूबर-नवंबर), बीमार पशु को अलग रखना, स्वच्छता।

मछलियों में वायरल हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया (VHS) 

  • कारक: 
    वायरल हेमोरेजिक सेप्टिसीमिया वायरस (VHSV)।
  • प्रभावित: 
    मीठे और खारे पानी की कई प्रजातियाँ (सैल्मन, ट्राउट, आदि)।
  • लक्षण: 
    उच्च मृत्यु दर, आंतरिक रक्तस्राव।
  • फैलाव: 
    दूषित पानी, अंडों के माध्यम से, मछली के आवागमन से।

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