सरकारी स्कूलों में प्री-नर्सरी शिक्षकों की भर्ती का मामला नए सिरे से कैबिनेट में जा रहा है। इस बार शिक्षा विभाग तीन विकल्प कैबिनेट में रखेगा। एनटीटी के मान्यता प्राप्त संस्थानों वाले दो साल के डिप्लोमा के आधार पर चयनित 87 अभ्यर्थियों को ही सिर्फ नियुक्ति दी जाएगी। इसके बाद नर्सरी टीचर ट्रेनिंग से यह भर्ती करने का विकल्प बंद हो जाएगा।
एक साल के डिप्लोमा से भर्ती करने का फैसला सरकार नहीं लेगी, क्योंकि एनसीटीई की गाइडलाइंस में यह प्रावधान नहीं है। शिक्षा मंत्री के साथ हुई विभाग की समीक्षा बैठक में यह सहमति बन गई है कि तीन तरह के विकल्प कैबिनेट में भेजे जाएं। पहला विकल्प यह होगा कि हिमाचल में जेबीटी को ही एनसीटीई से वन टाइम छूट लेकर भर्ती का मौका दिया जाए। दूसरा विकल्प अपने डाइट में दो साल का डिप्लोमा कोर्स शुरू करने का फैसला हो सकता है।
तीसरे विकल्प में अन्य राज्यों में चल रहे फार्मूले का अध्ययन करने को कहा गया है। स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने बताया कि इन तीन विकल्पों के आधार पर अब निदेशालय प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसे कैबिनेट में रखा जाएगा और राज्य सरकार जो निर्देश देगी, वैसे आगे बढ़ेंगे। ये भर्तियां समग्र शिक्षा के प्रोजेक्ट के तहत होंगी, इसलिए एनसीटीई की गाइडलाइन के मुताबिक ही कदम उठाने होंगे।
यदि राज्य सरकार के बजट से भर्ती करनी होती तो अन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता था। गौरतलब है कि हिमाचल में करीब 6200 प्री-नर्सरी टीचर्स की भर्ती पिछली भाजपा सरकार के समय से लंबित है। राज्य के सरकारी स्कूलों में प्री प्राइमरी कक्षाओं में बच्चे एडमिट कर लिए हैं, लेकिन जेबीटी ही अभी इन्हें संभाल रहे हैं।
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