हाईकोर्ट ने कुल्लू के देवता त्रियुगी नारायण मंदिर के कारदार विवाद में डीसी का समीक्षा आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वित्तीय गड़बड़ी पर हटाए गए व्यक्ति के बेटे को सीधे वंशानुगत हक नहीं मिल सकता। न्यायाधीश संदीप शर्मा की पीठ ने करम चंद की याचिका पर यह फैसला सुनाया। पुराने कारदार पुरुषोत्तम को 2017 में गड़बड़ी पर हटाया गया था। उनके निधन के बाद बेटे कृष्ण बलदेव ने पद पर दावा किया था।

डीसी कुल्लू ने बिना सभी पक्षों को सुने उसे सीधे कारदार नियुक्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि पारंपरिक नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में हारियानों की आम सहमति जरूरी है। अदालत ने डीसी को चार सप्ताह में बैठक बुलाकर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
Himachal High Court: जमानत बॉन्ड रद्द करने से पहले नोटिस देना अनिवार्य नहीं