हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत बॉन्ड की जब्ती को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि आरोपी के निर्धारित तिथि पर अदालत में पेश न होने की स्थिति में जमानत बॉन्ड जब्त करने से पहले जमानती को कारण बताओ नोटिस जारी करना अनिवार्य नहीं है। अदालत के अनुसार आरोपी की गैरहाजिरी बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन है और ऐसी स्थिति में बांड स्वतः जब्त माना जाएगा।
अदालत ने बीएनएसएस की धारा-491 का हवाला देते हुए कहा कि जमानत बॉन्ड की जब्ती की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होती है। पहले चरण में आरोपी के अदालत में पेश नहीं होने पर बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन होने के कारण उसे जब्त माना जाता है। इस स्तर पर जमानती को पूर्व में नोटिस देना जरूरी नहीं है।
स्पष्ट किया कि जमानती को अपनी बात रखने और बचाव का अवसर दूसरे चरण में दिया जाता है। जब अदालत जमानती से जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया शुरू करती है, तब उसे नोटिस जारी कर पूछा जाता है कि उस पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए। इस दौरान जमानती अपना पक्ष रख सकता है।
डिवीजन बेंच ने कहा कि बॉन्ड जब्त करने के पहले चरण में ही नोटिस जारी करना जरूरी कर दिया जाए तो न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होगी। इससे आरोपी भी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए इस व्यवस्था का लाभ उठा सकते हैं।
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