ऊना के रक्कड़ में धारा 118 का खुला उल्लंघन कर गैर-कृषक द्वारा अवैध कॉलोनी बसाने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य सरकार और प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने जवाब के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 22 दिसंबर तय की है।
याचिकाकर्ता भावक पराशर ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रतिवादी इंदु वालिया के पति राम प्रकाश को धारा 118 में गैर-कृषक घोषित किया जा चुका है। इस फैसले के खिलाफ दायर की गई अपील भी पहले ही पूरी तरह खारिज हो चुकी है। गैर-कृषक और जमीन मालिकों के बीच जॉइंट डेवलपमेंट समझौते के लिए सरकारी अनुमति जरूरी है।
आरोप है कि संबंधित अनुमति की जांच करने में राज्य सरकार पूरी तरह विफल रही है। एनजीटी और उपायुक्त ऊना की रिपोर्ट में भी कई बड़े खुलासे पहले हुए थे।कुल 11.96 हेक्टेयर में से केवल 5.16 हेक्टेयर भूमि ही इंदु वालिया के नाम दर्ज थी। संबंधित जमीन पर जापानी तूत, सिंबल और तुनी के पेड़ों का अवैध कटान किया गया था। इसके लिए 1,01,000 रुपये जुर्माना और 3,83,870 रुपये पर्यावरणीय मुआवजा भी लगाया गया था।
अदालत को बताया गया कि कॉलोनी बनाने के लिए पहाड़ियों को समतल किया जा रहा था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ता के नए तथ्यों पर जवाब के लिए समय मांगा है। हाईकोर्ट ने यह मांग स्वीकार करते हुए अगली तिथि निर्धारित की है।
कुल्लू कारदार विवाद: वंशानुगत दावे को झटका, DC के आदेश रद्द