हिमाचल का वार्षिक बजट 3,873 करोड़ रुपये बढ़ गया है। विधायकों की ऐच्छिक निधि, विभागों के पदों में बढ़ोतरी और कई अन्य योजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट के प्रावधान के चलते वार्षिक बजट में बढ़ोतरी हुई है।
बुधवार को 3,873 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 62,387.61 करोड़ का बजट पारित किया गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल विनियोग विधेयक 2025 सदन में पेश किया। इसे सदन ने ध्वनिमत से पारित किया गया।
मुख्यमंत्री ने 17 मार्च को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 58,514 करोड़ बजट पेश किया था। अब हिमाचल का वार्षिक बजट 62,387 करोड़ रुपये हो गया है। बजट में मुख्यमंत्री ने एक दर्जन योजनाओं का एलान भी किया था। बजट में किसी प्रकार के नए कर का कोई प्रावधान नहीं है।
सीमित बजट के बावजूद सुक्खू सरकार की ओर से हर वर्ग को कुछ न कुछ सौगात दी गई है। बजट में स्वास्थ्य, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि व सामाजिक सुरक्षा को प्रमुखता दी गई है। युवाओं, किसानों, महिलाओं, कर्मचारियों और बुजुर्गों के लिए कई घोषणाएं हुई हैं।
वर्ष 2025-26 के बजट में विकास कार्यों के लिए 24 फीसदी राशि का प्रावधान किया गया है। जबकि कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन, भत्तों पर कुल बजट में से 45 फीसदी राशि खर्च होगी। 12 फीसदी बजट कर्ज के ब्याज को चुकाने पर खर्च होगा। 10 फीसदी बजट राशि कर्ज वापस लेने पर खर्च होगी। 9 फीसदी हिस्सा स्वायत्त संस्थानों के लिए अनुदान पर खर्च होगा।
बजट में प्रदेश सरकार ने 25 हजार नौकरियां देने, कर्मचारियों को 3 फीसदी डीए देने, आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम 12,750 रुपये वेतन देने, 70 से 75 वर्ष के पेंशनरों को बकाया एरियर देने, न्यूनतम दिहाड़ी 425 रुपये और मनरेगा मजदूरी 20 रुपये बढ़ाने की घोषणा की गई है।
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