हिमाचल के मंदिरों में करीब तीन वर्षों की समयावधि में श्रद्धालुओं ने चार अरब से अधिक की राशि चढ़ावें के तौर पर अर्पित की है। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के अधीन आने वाले राज्य के 36 मंदिरों में से 31 के चढ़ावे की राशि का यह आंकड़ा है। इनमें 21 मंदिर ऐसे भी हैं, जहां पर इस अवधि में करोड़ों रुपए का चढ़ावा हुआ है।
विधायक केवल सिंह पठानिया के तारांकित प्रश्र के लिखित जवाब में डिप्टी सीएम मुकेश अग्रिहोत्री ने यह आंकड़े दिए है। यह आंकड़े एक जनवरी 2024 से पहली अगस्त, 2026 तक के है। आंकड़ों के तहत वर्ष 2024 में इन मंदिरों में 1,53,32,04,831 रुपए की राशि अर्पित की गई है, जबकि वर्ष 2025 में 1,57,51,41,576 और पहली अगस्त, 2026 तक 1,09,04,91,044 रुपए का चढ़ावा चढ़ा है।
इस हिसाब से तीन वर्षो की इस समयावधि में प्रदेश के इन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने 4,19,88,37,451 रुपए की राशि चढ़ावे के तौर पर अर्पित की है। डिप्टी सीएम ने बताया कि संबंधित अधिनियम के तहत किए प्रावधानों के तहत इस राशि को तीर्थ स्थलों के विकास, श्रद्धालुओं की मूलभुत सुविधाएं प्रदान करने, प्रशासनिक कार्यो, कर्मचारियों के वेतन, बिजली बिल, सुरक्षा व्यवस्था, विकास कार्यो, मंदिर सौंदर्यीकरण समेत शिक्षण संस्थानों के संचालन व गौशाला तथा धार्मिक अनुष्ठानों एवं मेलों व पुजारी हिस्सों के आबंटन आदि में खर्च किया जाता है। मंदिरों की आय का 15 प्रतिशत गौसदन के निर्माण एवं रखरखाव तथा उन्नयन या गौवंश संवर्धन के लिए उपयोग किया जा सकता है।
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