केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की जांच में हिमाचल प्रदेश के 65 दवा उद्योगों में निर्मित 82 दवा नमूने गुणवत्ता जांच में खरे नहीं उतर पाए हैं। इनमें बुखार व दर्द, बैक्टीरियल संक्रमण, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गैस व एसिडिटी, एनीमिया, एलर्जी, त्वचा रोग, उल्टी तथा विटामिन और कैल्शियम की कमी के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं, इंजेक्शन, सिरप, क्रीम, जेल और ऑइंटमेंट शामिल हैं।

इन दवा उत्पादों का निर्माण बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, पांवटा साहिब, कालाअंब, मोगीनंद, मैहतपुर, बाथू हरोली, नूरपुर, संसारपुर टैरेस, कुमारहट्टी और सुबाथू स्थित उद्योगों में हुआ है। सीडीएससीओ के जुलाई 2026 के ड्रग अलर्ट में देशभर में कुल 240 मामले सामने आए हैं, जिनमें दो दवाओं को नकली यानी स्प्यूरियस श्रेणी में रखा गया है। इनमें अकेले हिमाचल प्रदेश में निर्मित 82 दवा नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हुए हैं।
यानी देशभर में सामने आए कुल मामलों में करीब एक तिहाई हिस्सेदारी हिमाचल की है। चिंता की बात यह है कि प्रदेश के 82 फेल नमूनों में से 52 दवाएं अकेले बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ स्थित उद्योगों में निर्मित हैं, जिससे एक बार फिर देश के सबसे बड़े फार्मा हब बीबीएन में दवा गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। जांच में दवाओं के नमूने डिसॉल्यूशन, अस्से, डिसइंटीग्रेशन, आइडेंटिफिकेशन, पीएच और स्टेरिलिटी जैसे परीक्षणों में फेल पाए गए हैं।
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