HP Panchayat Election: पंचायतीराज विभाग ने पंचायत चुनाव को लेकर रोस्टर निर्धारण की प्रक्रिया नए संशोधित नियमों के अनुसार शुरू कर दी है। सरकार की ओर से चुनावी नियमों में किए जा रहे बदलाव के तहत यह प्रावधान किया जा रहा है कि वर्ष 2015 और 2020 में लगातार किसी श्रेणी के लिए आरक्षित रही पंचायतों को आगामी चुनाव में अनारक्षित किया जाएगा। संशोधित नियमों में जारी होने वाला रोस्टर उन लोगों को झटका दे सकता है, जो यह मानकर चल रहे हैं कि पिछले दो कार्यकाल से आरक्षित पंचायतें इस बार निश्चित रूप से अनारक्षित होंगी।
वास्तविक स्थिति रोस्टर जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। कई पंचायतें लगातार एक ही श्रेणी के लिए आरक्षित रहने के कारण सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिल रहा था। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह संशोधन पूरी तरह से इस समस्या का समाधान नहीं कर पाएगा।
प्रतिशतता होगा मुख्य आधार
पंचायतीराज विभाग के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में विभिन्न वर्गों के लिए कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक होने के कारण यह सुनिश्चित करना कठिन है कि कोई पंचायत एक या दो बार से अधिक आरक्षित न हो। ऐसे में यह संभावना बनी रहती है कि जो पंचायत 2020 में आरक्षित थी, वह 2026 में भी फिर से आरक्षित हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां आरक्षित वर्गों की आबादी अधिक है। यदि किसी विकास खंड में 62 पंचायतें हैं और वहां अनुसूचित जाति (21 प्रतिशत), अन्य पिछड़ा वर्ग (20 प्रतिशत) और अन्य श्रेणियों की आबादी के आधार पर आरक्षण तय किया जाता है, तो कई पंचायतों में पुनः आरक्षण लागू करना पड़ सकता है।
इसी तरह, 72 पंचायतों वाले एक अन्य विकास खंड में गणना के अनुसार आरक्षण लागू करने के लिए उपलब्ध पंचायतों से अधिक सीटों की आवश्यकता पड़ती है, जिससे कुछ पंचायतों में तीसरी बार भी आरक्षण लागू होने की स्थिति बन जाती है। इस तरह के गणितीय असंतुलन के चलते यह साफ है कि संशोधित नियमों के बावजूद बार-बार आरक्षण की प्रवृत्ति पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। अलग-अलग विकास खंडों में यह स्थिति अलग-अलग स्तर पर देखने को मिल सकती है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अंतिम रूप से जारी होने वाले रोस्टर में किन पंचायतों को आरक्षित और किन्हें अनारक्षित किया जाता है।
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