प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना (PMGSY) के चार के दूसरे चरण के तहत कांगड़ा-चंबा के 124 गांवों को सडक़ सुविधा से जोडऩे की योजना अंतिम चरण में पहुंच गई है। इसमें 98 गांवों के प्रोपोजल पर कार्य काफी आगे बढ़ चुका है, जिन्हें अब जल्द ही केंद्र सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इसके लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही हैं।
PMGSY-4 का दूसरा चरण: कांगड़ा-चंबा के 124 गांवों को सड़क से जोड़ने की तैयारी
दूसरे चरण में 250 से अधिक आबादी वाले ऐसे गांवों को चिन्हित किया गया है, जो अभी तक सडक़ सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा व चंबा क्षेत्र में इस योजना के तहत कुल 124 डीपीआर तैयार की जा रही हैं। इनमें सबसे अधिक 91 डीपीआर चंबा जिले के लिए हैं, जबकि कांगड़ा की 33 डीपीआर शामिल हैं। डीपीआर तैयार होने के बाद इन्हें तकनीकी अनुमोदन के लिए एनआईटी हमीरपुर स्थित राज्य तकनीकी एजेंसी के पास भेजा जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और संबंधित विभाग को बजट स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजे जाएंगे।
विभागीय स्तर पर चंबा जिले में सबसे अधिक कार्य डलहौजी लोक निर्माण विभाग सर्किल के अंतर्गत प्रस्तावित हैं। यहां 91 डीपीआर तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा पालमपुर सर्किल में नौ, नूरपुर में छह और देहरा सर्किल में छह डीपीआर पर काम चल रहा है। पीएमजीएसवाई के तहत अब सडक़ों के निर्माण कार्य के लिए केंद्रीय मंत्रालय व विभाग की ओर से स्पष्ट नियम बनाए गए हैं, जिसमें सडक़ बनाए जाने वाली भूमि में वन भूमि होने पर एफआरए व निजी भूमि होने पर सरकार के नाम म्युटेशन होना अनिवार्य किया गया है। सडक़ को पांच वाई सात मीटर का क्षेत्र होना अनिवार्य है। साधारण सडक़ के लिए पांच व मोड़ में सात मीटर क्षेत्र होना आवश्यक है।
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