हिमाचल प्रदेश का इतिहास : मौर्योत्तर काल (शुंग, कुषाण वंश)

Vardhan period and Hiuen Tsang Himachal history

मौर्योत्तर काल (शुंग, कुषाण वंश)- मौयों के पतन के बाद शुंग वंश पहाड़ी गणराज्यों को अपने अधीन नहीं रख पाए और वे स्वतंत्र हो गए। ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी के आसपास शकों का आक्रमण शुरू हुआ।

शकों के बाद कुषाणों के सबसे प्रमुख राजा कनिष्क के शासनकाल में पहाड़ी राज्यों ने समर्पण कर दिया और कनिष्क की अधीनता स्वीकार कर ली। कुषाणों के 40 सिक्के कालका-कसौली सड़क पर मिले हैं। कनिष्क का एक, सिक्का काँगड़ा के कनिहारा में मिला है।

 

पहाड़ी राजा कुषाणों के साथ अपने सिक्के चलाने के लिए स्वतंत्र थे। दूसरी शताब्दी के अंत और तीसरी शताब्दी के प्रारंभ में कुषाणों की शक्ति कमजोर होने पर यौद्धेय, अर्जुनायन (पंजाब) और कुलिन्दों ने मिलकर कुषाणों को सतलुज पार धकेल दिया और अपनी आजादी के प्रतीक के रूप में सिक्के चलाए।

Post Mauryan period (Shunga, Kushan dynasty)

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