चंबा में जन आंदोलन क्यों हुआ? | People’s movement in Chamba

Peoples movement in Chamba

People’s movement in Chamba: चम्बा में भी अनेक जन आन्दोलन हुए। यहां कभी लोगों ने राजा के अन्याय के विरोध में आवाज उठाई व कभी ब्रिटिश अधिकारियों के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई गई। वर्ष 1863 में चम्बा में राजा श्रीसिंह के काल में राज्य में बहुत अधिक अराजकता फैल गई।

 

प्रशासन भी अव्यवस्थित हो गया तथा रियासत की आर्थिक व्यवस्था भी पूर्णतः खराब हो गई। इस समस्या से निपटने हेतु राजा ने ब्रिटिश सरकार से किसी अंग्रेज अफसर को भेजने हेतु सहायता मांगी।

पंजाब की सरकार ने मेजर बलेयर रीड को चम्बा का सुपरिडेन्डेन्ट घोषित कर उन्हें यहां भेजा। इस प्रकार रियासत का प्रशासन एक अंग्रेज के अधीन आ गया। मेजर रीड ने ब्रिटिश प्रशासन प्रणाली के अनुसार ही रियासत का प्रशासनिक प्रबन्ध किया व अराजकता को दूर किया। वर्ष 1895 में राजा शाम सिंह तथा वजीर गोविन्द राम ने विरोधों के फलस्वरूप किसानों ने चम्बा रियासत में सार्वजनिक किसान आन्दोलनों की शुरुआत की।

राजा के काल में किसानों पर भूमि लगान अधिक था, अतः ब्रिटिश अफसरों के आदेश पर ‘बेगार’ की भी मांग की जाने लगी। बेगार के नियमानुसार हर परिवार का एक सदस्य रियासत के कार्य वर्ष को 6 माह तक के कार्यकाल तक करता है।

‘बेगार’ प्रथा में निम्नलिखित कार्यों को कराया जाता था

((1)) अंग्रेज अफसरों को बोझा ढोकर देना।

(2) महलों में जाकर राजाओं का कार्य करना।

(3) सार्वजनिक कार्यों को इन बेगारियों से करवाना आदि।

इन बेगारियों को न तो किसी प्रकार की मजदूरी प्रदान की जाती थी न ही रियासत इन्हें भोजन प्रदान करती थीं। बेगार मुक्त के अन्तर्गत सिर्फ उच्च श्रेणी के राजपूत तथा ब्राह्मण ही आते थे। जनता ने प्रशासन से बेगार को कम करने के लिए व भूमि लगान से कुछ राहत देने के लिए प्रार्थना की। मगर न तो अंग्रेज अफसरों ने तथा न ही राजा ने प्रजा की इस प्रार्थना पर ध्यान दिया था। किसानों को विवश होकर आन्दोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

 

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