शिमला : पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि सरकार की मंशा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पतन की तरफ ले जाने और उसके कांग्रेसीकरण करने की है। यदि मुख्यमंत्री और सुख की सरकार शिक्षा के क्षेत्र में कुछ कर सकती है तो वह शिक्षा काे रोजगारोन्मुखी बनाए तो बेहतर होगा।
जारी बयान में उन्होंने कहा कि शिक्षा का कांग्रेसीकरण हम नहीं करने देंगे। सत्ता में आने के बाद से 3 साल में ही लगभग 2000 शिक्षण संस्थानों पर ताला लगाने वाली सरकार के मुंह से शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की बात निकलनी चाहिए लेकिन जिम्मेदार लोग शिक्षा के कांग्रेसीकरण की बात करते हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रदेश शिक्षा बोर्ड प्रदेश के छात्रों के शैक्षणिक योग्यता को परखने का माध्यम है, हिमाचल के नेताओं के अपनी ब्रांडिंग और आलाकमान की चाटुकारिता करने का नहीं। दुर्भाग्यवश यह पुस्तिका भी राजकीय प्रिंटिंग प्रैस के अलावा अन्यत्र जगह से प्रकाशित है।
उन्होंने कहा कि बाल दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड द्वारा एक पुस्तिका प्रकाशित करवाई गई। उस पुस्तिका को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के बारे में लिखे जाने का दावा किया गया है। इस पुस्तक को देखकर लगता है कि साहित्यिक नैतिकता को ताक पर रख दिया है। महान विचारकों के कथन को क्रैडिट तक नहीं दिया है। अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी जी का नाम पूरी पुस्तक में नहीं है।
महात्मा गांधी, पटेल को स्थान नहीं
इस पुस्तक को देखकर लगता है कि साहित्यिक नैतिकता को ताक पर रख दिया है। महान विचारकों के कथन को क्रेडिट तक नहीं दिया है। अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी का नाम पूरी पुस्तक में नहीं है। राष्ट्रीय एकता के प्रतीक लौह पुरुष सरदार पटेल का जिक्र भी नहीं है। जिनके बिना आधुनिक भारत का जिक्र भी बेमानी है। पुस्तिका या उसके चैप्टर के लेखक का नाम तक नहीं लिखा गया है।
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