हिमाचल प्रदेश का रौलाने उत्सव (Roulane Festival) किन्नौर ज़िले की प्राचीन आस्था और परंपराओं को संजोए हुए है। यह 5,000 साल पुराना उत्सव है जो सौनी नामक रहस्यमयी दिव्य परियों के सम्मान में मनाया जाता है।
मुख्य अनुष्ठान में दो पुरुष पारंपरिक किन्नौरी ऊनी वस्त्र पहने हुए प्रतीकात्मक दूल्हा (रौला) और दुल्हन (रौलाने) की भूमिका निभाते हैं। रौला और रौलाने का जुलूस नागिन नारायण मंदिर तक जाता है।

वे एक धीमा, भक्तिपूर्ण नृत्य करते हैं जो मानव और ईश्वर के बीच संबंध का प्रतीक है। यह उत्सव किन्नौर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और चिरस्थायी आध्यात्मिक प्रथाओं को दर्शाता है।
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