सोभाग प्रकाश के बड़े पुत्र महीचंद को औरंगजेब ने बुद्ध प्रकाश की उपाधि से सम्मानित कर सिरमौर का राजा स्वीकार किया। राजा बुद्ध प्रकाश की मुगल दरबार में अच्छी पहुँच थी।
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वह बेगम जहाँआरा को कस्तूरी, अनार, बर्फ आदि के उपहार भेजा करता था। उसका बेगम के साथ बराबर पत्र व्यवहार होता रहता था। बुद्ध प्रकाश की सेना को ‘देशु की धार’ पर क्योंथल की सेना ने पराजित किया था।
Sirmaur Riyasat : Shamsher Prakash (1856-98 AD)