Sirmaur Riyasat : शमशेर प्रकाश (1856-98 AD)

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शमशेर प्रकाश (1856-98 ई.) – 

विलियम हे ने सिरमौर का प्रशासन चलाने के लिए 1857 ई. में मेहता देवी दत्त और मोतीराम भण्डारी के नेतृत्व में कमेटी बनाई क्योंकि राजा शमशेर प्रकाश 10 वर्ष की आयु में राजा बने थे। शमशेर प्रकाश ने 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों की सहायता की थी।

विद्रोह की समाप्ति पर सरकार ने कुंवर सुरजन सिंह को खिल्लत दी और राजा शमशेर प्रकाश को सात तोपों की सलामी दी जिसे 1867 में बढ़ाकर 11 कर दिया गया। शमशेर प्रकाश ने राज्य का प्रशासन अंग्रेजी सरकार की प्रशासन प्रणाली पर चलाने का प्रयास किया। उसने चार तहसीलों में राज्य को विभक्त कर तहसीलदार नियुक्त किए।

 

वर्ष 1888 ई. में राजा ने ‘इम्पीरियल सर्विस टूप्स‘ नाम की एक सैनिक टुकड़ी तैयार की। शमशेर प्रकाश ने 1878 में पहली बार जमीन का बंदोबस्त कराया। यह बंदोबस्त लाहौर के मुन्शी नंदलाल की देख-रेख में हुआ। इस बंदोबस्त का विरोध संगडाह के नम्बरदार उछबू और प्रीतम सिंह ने किया जिन्हें पकड़ कर राजा के पास नाहन भेज दिया गया।

 

दूसरी बार जमीन का बंदोबस्त 1887 ई. में परमेश्वरी सहाय की देखरेख में हुआ। राजा ने 1867 में नाहन में नाहन फाऊंड्री नाम से लोहे का कारखाना खोला। नाहन में डिस्ट्रिक्ट बोर्ड का मुख्यालय बनाया गया जिसकी स्थापना 1884 ई. में हुई थी। अंग्रेजी को 1890 ई. में सरकारी काम-काज की भाषा बनाया गया।

शमशेर प्रकाश ने 1893 ई. में ‘नाहन नेशनल बैंक’ खोला। 1944 में इसका नाम ‘बैंक ऑफ सिरमौर’ रखा गया।

शमशेर प्रकाश के शासनकाल में 1867 ई. में रानीताल बाग, 1868 ई. में नाहन Municipal कमेटी की स्थापना हुई। 1898 ई. में लार्ड रिप्पन नाहन आए। जबकि 1885 ई. में लार्ड डफरिन नाहन आए। 1880 ई. में शमशेर प्रकाश ने अपने रहने के लिए शमशेर विला बनवाया।

 

1878 ई. में शमशेर प्रकाश ने लॉर्ड लिट्न के नाहन प्रवास की स्मृति में लिट्न मैमोरियल (दिल्ली गेट) बनवाया। शमशेर प्रकाश सबसे लम्बी अवधि तक शासन करने वाले (42 वर्ष) सिरमौर के राजा है। शमशेर प्रकाश के बाद टिक्का सुरेन्द्र विक्रम सिंह (1898-1911) राजा बने।

Shamsher Prakash (1856-98 AD)

राजा शमशेर प्रकाश 10 वर्ष की आयु में राजा बने थे। शमशेर प्रकाश ने 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों की सहायता की थी।

 

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