HP Compassionate Jobs: हिमाचल हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, अनुकंपा नौकरी पर दिया अहम फैसला

Himachal High Court

HP Compassionate Jobs: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलने के साथ ही संबंधित परिवार का संकट काल समाप्त माना जाता है। ऐसे में कर्मचारी को सामान्य कर्मियों की तरह ही अपने कॅरिअर में आगे बढ़ना होगा, उसे किसी विशेष दर्जे या असीमित करुणा का लाभ नहीं दिया जा सकता।

 

अदालत ने साफ किया कि अनुकंपा नियुक्ति नियमित भर्ती का जरिया नहीं, बल्कि परिवार को अचानक आए वित्तीय संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली सीमित राहत मात्र है। न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने यह व्यवस्था पुलिस विभाग में अनुबंध पर तैनात क्लर्क जनक दुलारी की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए दी। अदालत ने कहा कि एक बार बिना किसी विरोध के पद स्वीकार कर लेने के बाद कर्मचारी को अपनी मर्जी से पद की स्थिति या सेवा शर्तों को अनुबंध से नियमित में बदलवाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं रह जाता।

 

मामले के अनुसार याचिकाकर्ता जनक दुलारी के पति राम स्वरूप पुलिस विभाग में सेवा के दौरान लापता हो गए थे। इसके बाद उनका सेवाकाल समाप्त मान लिया गया था। परिवार को तात्कालिक वित्तीय संकट से बचाने के लिए राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता को 23 जून 2007 को पुलिस महानिदेशक कार्यालय में अनुकंपा आधार पर अनुबंध क्लर्क नियुक्त किया था।

 

याचिकाकर्ता ने 2013 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर विभाग के 2012 के उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत उनकी नौकरी को नियुक्ति की तारीख (2007) से नियमित करने का दावा खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि विभाग में अन्य कई आश्रितों को नियमित पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं, इसलिए उनके साथ भेदभाव न किया जाए। अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। HP Compassionate Jobs

 

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FAQ

प्रश्न 1: हिमाचल हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति पर क्या फैसला सुनाया?

उत्तर: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जनक दुलारी की याचिका खारिज कर दी। याचिका में नियुक्ति को वर्ष 2007 से नियमित करने की मांग की गई थी।

प्रश्न 2: अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु या संबंधित परिस्थितियों के कारण परिवार पर आए अचानक वित्तीय संकट से राहत देना है। यह नियमित भर्ती का सामान्य विकल्प नहीं है।

प्रश्न 3: जनक दुलारी को अनुकंपा आधार पर कब नियुक्त किया गया था?

उत्तर: उपलब्ध मामले के विवरण के अनुसार, जनक दुलारी को 23 जून 2007 को पुलिस महानिदेशक कार्यालय में अनुबंध क्लर्क के पद पर नियुक्त किया गया था।

प्रश्न 4: जनक दुलारी ने हाईकोर्ट में याचिका क्यों दायर की थी?

उत्तर: उन्होंने विभाग के 2012 के आदेश को चुनौती देते हुए अपनी नियुक्ति को वर्ष 2007 से नियमित करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि विभाग में अन्य आश्रितों को नियमित पदों पर नियुक्तियां मिली थीं।

प्रश्न 5: क्या अनुकंपा नियुक्ति मिलने से कर्मचारी को स्वतः नियमितीकरण का अधिकार मिल जाता है?

उत्तर: नहीं। केवल अनुकंपा आधार पर नियुक्ति मिलने से स्वतः नियमितीकरण का अधिकार नहीं मिलता। नियमितीकरण संबंधित सेवा नियमों, लागू नीतियों और कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है। 

 

Author: Ram Bhardwaj

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