बढ़ते एनपीए ने बिगाड़ी सहकारी बैंकों की सेहत, लोन रिकवरी न होने से हालत ज्यादा खराब

हिमाचल प्रदेश के सहकारी बैंक एनपीए के जाल में फंसते जा रहे हैं। साल दर साल इनके एनपीए में बढ़ोतरी हो रही है, जिस पर सरकार ने भी इनको अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने के आदेश दिए हैं। सालों से चल रहे लोन की रिकवरी समय पर नहीं होने से बैंकों पर एनपीए खड़ा है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की भी इन पर कड़ी नजर है।

राज्य में तीन बड़े सहकारी बैंक हैं और तीनों में एनपीए है। चाहे कांगड़ा सहकारी बैंक हो या फिर राज्य सहकारी बैंक या जोगिंद्रा बैक तीनों में एनपीए है, जिसकी समीक्षा राज्य सरकार ने हाल ही में की है। राज्य सहकारी बैंक का एनपीए इस वक्त 8.19 फीसदी तक बताया जाता है। जानकारी के अनुसार सहकारी बैंक ने पूर्व में पावर प्रोजेक्टों को लगाने के लिए हिमाचली उत्पादकों को लोन दे रखे हैं, मगर उनसे अब तक रिकवरी नहीं हो पा रही है।

हाइड्रो पावर प्रोजेक्टों का निर्माण अधर में लटका है, वहीं जिन्होंने प्रोजेक्ट बना लिए हैं, उनकी बिजली उस दाम पर नहीं बिक पा रही है, जिससे रिकवरी हो सके। ऐसे में मामला फंसा हुआ है और राज्य सहकारी बैंक एनपीए में पड़ा है। इसका एनपीए इसी कारण से बताया जाता है, जबकि दूसरे मामलों में  बैंक की कार्यप्रणाली सही बताई जा रही है।

उधर, कांगड़ा को-ऑपरेटिव बैंक का एनपीए सबसे अधिक 26.3 फीसदी है। यहां लोन मामलों को लेकर एक जांच विजिलेंस भी कर रही है, क्योंकि पूर्व में बड़े पैमाने पर लोन दिए गए, मगर रिकवरी नहीं हो सकी है। अब रिकवरी पर यह बैंक ध्यान दे रहा है और तेजी के साथ रिकवरी होने लगी है।

हाल ही में हुई समीक्षा में बैंक ने रिकवरी को बढ़ाए जाने से आए नतीजों को सामने रखा है। पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ जांच यहां पर चल रही है। जोगिंद्रा को-ऑपरेटिव बैंक का एनपीए नौ फीसदी तक बताया जाता है, जिसको भी रिकवरी में सुधार करने के निर्देश सरकार की तरफ से दिए गए हैं।

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