बोह घाटी : मलबे में दफन अंतिम शव भी रेस्क्यू, सभी लोगों के शव बरामद, तीन दिन से तलाश कर रही थी टीम

कांगड़ा जिला के शाहपुर उपमंडल की बोह घाटी के रूलेहड़ में भू-स्खलन के कारण मलबे में दबे सभी 10 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। हादसे के बाद सात दिनों तक चला रेस्क्यू रविवार देर शाम पूरा हो गया। घटना के सातवें दिन रविवार को 18 वर्षीय नीरज पुत्र स्व. भीमसेन के शव को भी मलबे से निकाल लिया गया है।

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उपयुक्त कांगड़ा डा. निपुण जिंदल ने इसकी पुष्टि की है। गौरतलब है कि उक्त युवक की तलाश में पिछले तीन दिन से बचाव दल प्रयास कर रहा था। 12 जुलाई को हुए शाहपुर के बोह हादसे में पांच लोगों को पहले ही दिन जिंदा निकाल लिया गया था, जबकि एक 21 वर्षीय युवती ममता पुत्री भीमसेन का शव बरामद हुआ था।

उसके बाद अगले दिन 13 जुलाई को चार शव मलबे से बरामद हुए, जिनमें 15 वर्षीय कार्तिक पुत्र भीमसेन, 45 वर्षीय मस्तो देवी पत्नी भीमसेन, 30 वर्षीय शिव प्रसाद पुत्र सुभाष चंद तथा 60 वर्षीय महिला शकुंतला देवी पत्नी प्रकाश चंद शामिल थीं। वहीं, 14 जुलाई को तीन शव बरामद हुए, जिनमें 45 वर्षीय कंचना देवी पत्नी मेघनाथ, 46 वर्षीय भीमसेन पुत्र घनिया राम तथा 18 माह की शबनम पुत्री विजय कुमार शामिल थे। इसके बाद 15 जुलाई को 75 वर्षीय सुभाष चंद का शव बरामद किया गया, जबकि इसके तीन दिन बाद रविवार को नीरज का शव बरामद हुआ।

कुदरत के कहर से पूरा परिवार खत्म

बोह में हुए दर्दनाक हादसे ने एक परिवार के सभी पांच लोगों को लील लिया। इस दर्दनाक हादसे में भीमसेन, उसकी पत्नी मस्तो देवी, दो बेटे कार्तिक और नीरज तथा एक बेटी ममता की भी जान चली गई है। वहीं एक परिवार से पिता सुभाष चंद और बेटा शिव प्रसाद भी अपनी जान गवां चुके हैं। मरने वालों में एक ही परिवार के चार लोग शामिल हैं।

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