Quad Group : अब समुद्र में चीन की हर गतिविधि पर रहेगी नजर, ट्रैक होगी ड्रैगन की हर हलचल

Quad Group – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को टोक्यो में जिस क्वाड समूह की बैठक में भाग लेंगे, वह समूह चीन पर अंकुश लगाने की बड़ी तैयारी कर रहा है। हिंद और प्रशांत क्षेत्र में चीन की मनमानी और आक्रामक गतिविधियों को रोकने के लिए अमरीका, जापान, भारत और आस्ट्रेलिया का यह सम्मिलित समूह जापान के टोक्यो में बैठक के दौरान एक साझा पहल का अनावरण करेंगे.

जिसके तहत क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को ट्रैक करने में और उसकी योजनाओं को समझने में मदद मिलेगी। हालांकि क्वाड समूह अपनी इस पहल को चीन की अवैध तरह से मछली पकड़ने की गतिविधियों को ट्रैक करने के नाम पर लांच करेगा। दरअसल, चीन लगातार कोरिया से लेकर जापान और भारत तक निगरानी के लिए अपने  फिशिंग वेसेल्स यानी मछली पकड़ने के जहाजों जहाजों को भेजता रहा है।

जापान के ससाकावा पीस फाउंडेशन इन्फार्मेशन फ्रॉम दि सेंटर फॉर आइलैंड स्टडीज के मुताबिक चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी इन्हीं मछली पकड़ने वाली नौकाओं के जरिए अवैध तरह से दूसरे देश की सीमाओं में एंट्री करती है। चीन अपने इस तंत्र का फायदा दो तरह से उठाता है। इसके जरिए चीन पूर्वी चीन सागर से लेकर दक्षिण चीन सागर तक अपने कूटनीतिक दावों को साबित करने की कोशिश करता है।

चीन इसके जरिए जापान, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों की समुद्री सीमा को भी पार करता है, ताकि उनके समुद्री क्षेत्र पर भी अपना दावा कायम कर सके। इसके अलावा कई बार चीनी नौसेना इन फिशिंग बोट्स के बहाने अपने निगरानी जहाजों को भी दूसरे देशों की जासूसी के लिए पहुंचा देती है। यह निगरानी जहाज पूरी तरह से चीनी सेना के नियंत्रण में रहते हैं।

दक्षिण कोरिया और इक्वाडोर पिछले तीन साल में कई बार ऐसे मामलों को रिपोर्ट कर चुके हैं। अमरीका के एक अधिकारी ने बताया कि अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन, जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा, भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और आस्ट्रेलिया के नवनिर्वाचित पीएम एंथनी एल्बनीज मंगलवार को सम्मिट के बाद अपनी नई योजना को लांच करेंगे। अफसर ने दावा किया कि चीन इस वक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र में 95 फीसदी अवैध तरह से मछली पकड़ने की घटनाओं के लिए जिम्मेदार है।

Quad Group
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क्वाड देशों की यह पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की ओर से छोटे देशों पर वर्चस्व जमाने की कोशिशों पर भी लगाम लगाने में कारगर हो सकती है। दरअसल, चीन अपनी इन्हीं फिशिंग बोट्स के बड़े बेड़ों को दूसरे देशों की समुद्री सीमा के पार भेजकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है। चारों देशों की यह पहल चीन के उस कदम के बाद आई है, जिसके तहत वह अब किरीबाती और सोलोमन आईलैंड्स के साथ सुरक्षा समझौता करने की योजना बना रहा है।

सेटेलाइट तकनीक से लिंक होगा क्वाड का सर्विलांस सेंटर.

क्वाड की पहल के तहत सिंगापुर, भारत और प्रशांत महासागर में मौजूद सर्विलांस सेंटर्स को सेटेलाइट तकनीक से जोड़ने का काम किया जाएगा और अपनी तरह का एक ट्रैकिंग सिस्टम तैयार होगा, जिससे हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्वी एशिया से लेकर दक्षिण प्रशांत तक ड्रैगन की गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी।

सेटेलाइट से नियंत्रित इस पूरे तंत्र का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे उन फिशिंग बोट्स को भी ट्रैक किया जा सकेगा, जो ट्रैकिंग से बचने के लिए अपने ट्रांसपांडर यानी समुद्र से नजदीकी स्टेशन को भेजे जाने वाले सिग्नल को ब्लॉक कर लेती हैं।

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