NPS कर्मचारियों ने काले रिबन बांध मनाया ब्लैक-डे, पुरानी पैंशन बहाली की उठाई मांग

हिमाचल एनपीएस कर्मचारी महासंघ ने शनिवार को काला रिबन बांध कर प्रदेश में ब्लैक-डे मनाया। इस दौरान सरकार द्वारा एनपीएस कर्मचारियों की लगातार की जा रही अनदेखी पर भी पदाधिकारियों ने रोष प्रकट किया। यह जानकारी महासंघ के प्रदेश महासचिव भरत शर्मा ने दी।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर बैक डेट 15 मई, 2003 से हिमाचल में एनपीएस को लागू किया था। इस काले कानून को लागू किए जाने से पहले कर्मचारियों से कोई भी वार्ता नहीं की गई। इस वजह से आज एनपीएस कर्मचारी अपने बुढ़ापे की लाठी खो चुका है और काले कानून की वजह से आज कर्मचारियोंं को रिटायर होने पर नाममात्र की पैंशन मिल रही है।

कोरोना से हो चुकी है 22 एनपीएस कर्मचारियों की मृत्यु

भरत शर्मा ने कहा कि बीते 3 सप्ताह में 22 एनपीएस कर्मचारियों की मृत्यु कोरोना से हुई है। एनपीएस के दायरे में आने के कारण उनके परिवार को पारिवारिक पैंशन की कोई भी सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा है कि एनपीएस महासंघ अपनी मांगों को कई बार सरकार के समक्ष उठा चुका है लेकिन अभी तक कोई भी सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।

 

भरत शर्मा ने कहा कि महासंघ सरकार से लगातार यह मांग भी कर रहा है कि कर्मचारियों के हितों को देखते हुए कम से कम वैश्विक महामारी के इस दौर में केंद्र द्वारा जारी की गई 2009 की ही अधिसूचना को लागू कर दिया जाए ताकि सेवाएं देते हुए मृत होने वाले कर्मचारियों के परिवारों को पारिवारिक पैंशन मिले सके।

महासंघ का उद्देश्य पुरानी पैंशन बहाली : प्रदीप ठाकुर

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर ने कहा कि महासंघ का उद्देश्य पुरानी पैंशन बहाली के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा करना भी है। इसके लिए महासंघ अपने स्तर पर पूरे प्रयास कर रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि अपने वायदे के अनुरूप पुरानी पैंशन बहाली के लिए कमेटी का गठन करने के साथ ही 2009 की अधिसूचना को तुरंत प्रभाव से प्रदेश में लागू करे।

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