Jagannath Rath Yatra : कोरोना ने रोके भगवान श्रीजगन्नाथ रथयात्रा के पहिए

हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल नाहन की भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा लगातार दूसरी बार कोरोना की भेंट चढ़ गई है। जिला प्रशासन ने हिमाचल प्रदेश सरकार के कोरोना की एसओपी का हवाला देते हुए श्री जगन्नाथ रथ यात्रा मंडल नाहन का रथयात्रा के भव्य आयोजन को अनुमति नहीं दी।

हालत यह रही कि रविवार को हिमाचल प्रदेश के एकमात्र पौराणिक व ऐतिहासिक भगवान श्रीजगन्नाथ जी के मंदिर से प्रतिवर्ष 25 से 30 हजार श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकलने वाली रथ यात्रा केवल 40-45 लोगों तक सिमट कर रह गई। जिला प्रशासन द्वारा श्री जगन्नाथ रथ यात्रा मंडल को भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा के रथ में आसीन मूर्तियों को तीन वाहनों में ले जाने की अनुमति दी गई थी।

करीब तीन से चार चरणों में प्रशासन के साथ श्री जगन्नाथ रथ यात्रा मंडल के पदाधिकारियों की बैठकों का दौर चला, परंतु अंत में प्रशासन ने सरकार व कोरोना की एसओपी का हवाला देते हुए अपने हाथ पीछे खींच लिए तथा भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा के विशाल आयोजन के लिए साफ इनकार कर दिया।

भगवान श्री जगन्नाथ जी के हजारों श्रद्धालुओं व आयोजन समिति के सदस्यों में प्रशासन के प्रति खासा रोष नजर आया। रविवार को तय कार्यक्रम व समय के अनुरूप भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा की मूर्तियों को 56 प्रकार के भोग लगाकर सूक्ष्म रथ में सवार करवाया गया।

Jagannath Rath Yatra
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भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा मंडल के अध्यक्ष प्रकाश बंसल ने बताया कि यह दुख का विषय है कि रथयात्रा के सूक्ष्म आयोजन केे लिए प्रशासन से तीन से चार चरणों में बैठक हुई, परंतु प्रशासन द्वारा रथयात्रा के आयोजन को अनुमति नहीं दी गई। फिर भी रथयात्रा पूरे विधि-विधान से निकाली गई तथा कोविड एसओपी का पालन किया गया।

उड़ीसा के पुरी की तर्ज पर निकाली जाती है यात्रा

उड़ीसा की पुरी की तर्ज पर नाहन शहर में निकलने वाली भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा इस वर्ष 13वां आयोजन था। गत 13 वर्षों से नाहन में विशाल रथ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। गत वर्ष यह आयोजन सूक्ष्म रूप में भी नहीं हो पाया था। इस वर्ष भी रथ यात्रा केवल 40-45 लोगों तक सिमट कर रह गई।

प्रतिवर्ष रथ यात्रा में 25 से 30 हजार श्रद्धालु शामिल होते थे। विशाल रथ को चौगान मैदान से खींचते हुए बस स्टैंड तक पहुंचाने में करीब 10 घंटे का समयलग जाता था।

बोलता हिमाचल

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