कोरोना के मौजूदा हालात देखते हुए ज्यादा छूट देना संभव नहीं : जयराम

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य में कोरोना संक्रमण के मौजूदा हालात को देखते हुए ज्यादा छूट देना संभव नहीं है। इस विषय पर मंत्रिमंडल की 24 मई को होने वाली बैठक में विस्तार से चर्चा होगी। मुख्यमंत्री ने यह बात प्रदेश सचिवालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के प्रतिदिन नए मामले आने और ठीक होने वालों की संख्या लगभग बराबर है लेकिन मृत्यु दर का कम न होना चिंता की बात है।

उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण लोगों की मृत्यु होने का प्रमुख कारण उपचार के लिए अस्पताल में देरी से पहुंचना है। उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए राज्य सरकार ने अभी से स्वास्थ्य विभाग को तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं ताकि इससे बच्चों को बचाया जा सके।

ब्लैक फंगस का दस्तक देना चिंताजनक

उन्होंने आईजीएमसी शिमला में ब्लैक फंगस का पहला मामला आने पर चिंता जताई तथा कहा कि सरकार स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य का ऑक्सीजन कोटा 15 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 30 मीट्रिक टन कर दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए इसे 40 मीट्रिक टन तक करने की आवश्यकता है तथा इस विषय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से बात की गई है। केंद्रीय मंत्री ने बातचीत के दौरान राज्य का ऑक्सीजन कोटा 40 मीट्रिक टन तक बढ़ाने के लिए अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

बैड कैपेसिटी को 5 हजार तक पहुंचाया

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बैड कैपेसिटी को 1,500 से बढ़ाकर 5 हजार तक कर दिया है। ऐसे में सरकार अब ऑक्सीजन की उपलब्धता को सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि मंडी में 100 बैड कैपेसिटी का मेक शिफ्ट अस्पताल 3 दिन के भीतर काम करना शुरू कर देगा। इसी तरह सरकार वैंटीलेटर से युक्त आईसीयू बैड बढ़ा रही है, जिसमें केंद्र सरकार से मदद मांगी गई है। कांगड़ा में मामलों की अधिकता को देखते हुए 20 अतिरिक्त वैंटीलेटर भेजे गए हैं, जो 2 दिन के भीतर क्रियाशील हो जाएंगे।

माता-पिता को खोने वाले बच्चों का होगा पुनर्वास

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कोरोना महामारी में माता-पिता को खोने वाले बच्चों का पुनर्वास होगा। सरकार 18 वर्ष तक के ऐसे अनाथ बच्चों को 2500 रुपए प्रतिमाह देगी। राज्य में अब तक महामारी के कारण अनाथ होने वाले ऐसे बच्चों की संख्या 9 के आसपास है। इसी तरह ऑनलाइन शिक्षा जारी रखने के लिए 598 बच्चों को 2 हजार रुपए प्रतिमाह प्रदान किए जाएंगे।

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