Landslide : टूटते पहाड़ों के पीछे भू-गर्भीय दोष, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

हिमाचल के टूट रहे पहाड़ों का बड़ा कारण भू-गर्भीय दोष निकला है। सिरमौर तथा किन्नौर हादसों के बाद जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट से यह बड़ा खुलासा हुआ है। पांवटा-शिलाई सड़क मार्ग में रेत की तरह खिसके सड़क मार्ग की बड़ी वजह  माइनिंग बताई गई है।

Landslide
किन्नौर हादसा

चूना पत्थर की खुदाई से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। किन्नौर के बटसेरी में पहाड़ का वर्टिकल स्लोप और रॉक फॉल मुख्य वजह है। सर्वे रिपोर्ट में बड़ा खुलासा है कि हिमालय रेंज में दो बड़े फ्रेक्चर होने के कारण चट्टानें खिसक रही हैं। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की दोनों जगहों की रिपोर्ट बताती है कि हिमाचल के नदी-नालों में निर्माण कार्य का मलबा डंप किया जा रहा है।

मलबे के ढेर लगातार की डंपिंग से छोटे-छोटे पहाड़ में तबदील हो रहे हैं। इसके बाद भारी बारिश के कारण नदी-नालों का पानी चोक होने के बाद तबाही मचा रहा है। किन्नौर जिला की सांगला वैली में बटसेरी के समीप खिसके पहाड़ों की अलग-अलग किस्म की दो चट्टानें बताई गई हैं। इन चट्टानों में चारों तरफ से दरारें पड़ी हैं। वर्टिकल स्लोप में 70 डिग्री एंगल से खड़े इन पहाड़ों में रॉक फॉल है।

सड़क मार्ग के निर्माण के बाद यहां लंबे समय से स्टोन शूटिंग हो रही है। इसी तरह पांवटा-शिलाई नेशनल हाईवे के खिसक जाने के बाद जारी हुई सर्वे रिपोर्ट ने खनन तथा डंपिंग इसकी मुख्य वजह बताई है। साथ में सड़क मार्ग का स्टेटा भी स्टेबल न होने की बजाय लूज है। इसी कारण नाले में जमा मलबे के बह जाने से मिट्टी का पहाड़ भी सड़क को बहाकर ले गया। 

 

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बोले, खिसकते पहाड़ों के लिए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण करवाएगी सरकार

शिमला। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमाचल के खिसकते  पहाड़ों के लिए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण करवाने का ऐलान किया है। इस सर्वेक्षण की सिफारिशों को राज्य में लागू कर निकट भविष्य में हादसों की पुनरावृत्ति को रोकने का प्रयास किया जाएगा।

 

सड़कों की डीपीआर पर सवाल

जियोलॉजिकल सर्वे की रिपोर्ट के बाद बड़े सवाल यह उठे हैं कि भू-गर्भीय दोष वाले स्थानों से सड़क परियोजनाएं क्यों निकाली गई? जियोलॉजिकल सर्वे की रिपोर्ट ने सड़क मार्गों की डीपीआर के लिए हुए सर्वेक्षण पर भी सवाल उठा दिए हैं। जाहिर है कि  मंडी-कुल्लू सड़क मार्ग पर स्थित हणोगी एलाईनमेंट के ऐसे सर्वेक्षणों की यह हाइवे सजा भुगत रहा है। कमोवेश यही स्थिति द्रंग-जोगिंद्रनगर के बीच भू-स्खलन की चपेट में आए हाइवे की बन चुकी है। अब सिरमौर, लाहुल स्पीति और किन्नौर के हाइवे इस जद में शामिल हो गए हैं।

दोषों को नजरअंदाज करना भारी

उद्घाटन और शिलान्यास की पट्टिकाओं  में रिबन काटने की होड़ में प्रदेश की सियासत और अफसरशाही पहाड़ के भू-गर्भ दोषों को नजरअंदाज कर रही है।  यही कारण है कि डीपीआर की भू-गर्भ रिपोर्ट को ठेंगा दिखाकर बेतरतीव निर्माण हो रहा है। सड़क परियोजनाओं के मुकाबले इसके लिए हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट  का अवैज्ञानिक ढंग से निर्माण ज्यादा कसूरवार है। इसके अलावा अवैध खनन और पेड़ कटान भी बड़ा खतरा बन गए हैं।

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