हिमाचल में सूखे ने निगल ली डेढ़ लाख हेक्टेयर फसल, प्रदेश को 10820.57 लाख का नुकसान

हिमाचल प्रदेश में मौसम की बेरुखी से सूखे जैसे हालात होने लगे हैं। बिलासपुर और चंबा में फसलों को इस वक्त सबसे अधिक नुकसान हुआ है।  शनिवार को मुख्य सचिव ने सभी जिलाधीशों से चर्चा कर स्थिति का जायजा लिया। मुख्य सचिव अनिल खाची ने प्रदेश में सूखे जैसी स्थिति की संभावना से निपटने के लिए विभिन्न जिलों की तैयारियों की समीक्षा की।

उन्होंने कृषि, बागबानी और संबद्ध विभागों को निर्देश दिए कि स्थिति से निपटने के लिए जिला स्तर पर कार्य योजना तैयार की जाए। वर्तमान में प्रदेश में पेयजल आपूर्ति सामान्य है, लेकिन कम वर्षा होने के कारण कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। मौसम की परिस्थितियों पर नजर बनाए रखने के लिए समूहों का गठन किया जाए और कृषि विभाग को मौसम व फसल की स्थिति पर डाटा एकत्र करना चाहिए, ताकि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सहायता प्रदान की जा सके।

मुख्य सचिव ने बताया कि जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कम वर्षा के कारण प्रदेश के कुल 413134 हेक्टेयर फसल क्षेत्र में से 146508 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिससे 10820.57 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।

सर्वाधिक नुकसान बिलासपुर जिला में हुआ है, जहां कुल 28020 हेक्टेयर फसल क्षेत्र में से 20280 हेक्टेयर क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। इस प्रकार जिला में 3259.37 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। चंबा जिला में 3571 हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ है, जिससे 815.58 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।

इसी प्रकार अन्य जिलों में भी फसल क्षेत्र को नुकसान होने की जानकारी प्राप्त हुई है। कम वर्षा होने से जल शक्ति विभाग की भी विभिन्न योजनाएं प्रभावित हुई हैं। विभाग की कुल 9526 योजनाओं में से 401 योजनाओं को 25 प्रतिशत तक, 197 योजनाओं को 25 से 50 प्रतिशत तक, 87 योजनाओं को 50 से 75 प्रतिशत तक, जबकि 28 योजनाओं को 75 प्रतिशत से अधिक क्षति हुई है।

पशुचारे की कमी नहीं

मुख्य सचिव ने कहा कि वर्तमान में किसी भी जिले में पशुचारे की कमी नहीं है, लेकिन पशुपालन विभाग को अभी से तैयारियां कर लेनी चाहिए। उन्होंने पशु रोगों की रोकथाम के लिए उन्होंने कार्यशील मोबाइल वैटेनेरी यूनिट तैयार रखने के निर्देश दिए।

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