सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। Supreme Court ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि हाई कोर्ट की इजाजत के बिना सासंदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस नहीं लिए जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें संबंधित हाई कोर्ट की इजाजत के बिना केस वापस नहीं ले सकेंगी। हाई कोर्ट हाल ही में केरल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर भी फैसला देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी हाई कोर्ट के रजिस्टार जरनल अपने चीफ जस्टिस को सांसद और विधायकों के खिलाफ लंबित निपटारे की जानकारी दें।

सीबीआई कोर्ट और अन्य कोर्ट सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई जारी रखें। सासंदों/विधायकों के खिलाफ आपराधिक ट्रायल के जल्द निपटारे की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट स्पेशल बेंच का गठन करेगा। गौरतलब है कि फरवरी 2020 के फैसले के पैरा 4.4 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक पार्टियों को आदेश दिया था कि उम्मीदवारों के चयन के 48 घंटों के भीतर या नामांकन दाखिल करने की पहली तारीख से कम से कम दो सप्ताह पहले उनका विवरण प्रकाशित करना होगा, मगर मंगलवार को नए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक पार्टियों को उम्मीदवारों के ऐलान के 48 घंटे के भीतर मुकदमों की जानकारी देनी होगी।

The Supreme Court on Tuesday said that criminal cases against MPs and MLAs will not be withdrawn without the permission of the High Court.

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