27 अप्रैल से लिए कोरोना सैंपल की नहीं आई रिपोर्ट, विभागीय चूक से बढ़ सकते हैं मामले

कोरोना सैंपल: एक ओर सरकार मामूली लक्षण पाए जाने पर भी कोरोना जांच करवाने के लिए जागरूक कर रही है तो दूसरी और यदि 5-5 दिन तक लोगों की कोरोना जांच रिपोर्ट ही न आए तो ऐसी विकट परिस्थिति में विभागीय लचर कार्यप्रणाली के अतिरिक्त इसे और क्या कहा जाएगा।

ऐसा ही मामला स्वास्थ्य विभाग खंड इंदौरा में सामने आया है जहां गत माह 27 अप्रैल व उसके 2 दिन बाद तक लिए गए लगभग 200 के करीब लोगों की कोरोना जांच हेतु सैंपल तो लिए गए लेकिन अब तक उनकी रिपोर्ट नहीं आ पाई है। ऐसे में रिपोर्ट न आने से उक्त में से कई ऐसे व्यक्ति जो स्वयं को स्वस्थ मान रहे हैं, वे अपने कार्यों के चलते न केवल अपने रिश्तेदारों के आ-जा रहे हैं बल्कि बाजार आदि से भी खरीद-फरोख्त कर रहे हैं।

ऐसे में यदि वे व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाए जाते हैं तो विभागीय चूक से कोरोना को लेकर स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है। क्योंकि कोरोना पॉजिटिव पाए गए व्यक्ति को तो प्रशासन द्वारा होम आइसोलेट किया जा सकता है लेकिन जिन व्यक्तियों की कोरोना जांच में पॉजिटिव या निगेटिव होने की पुष्टि नहीं हो जाती उनके बारे में निर्णय नहीं लिया जा सकता और ऐसे व्यक्तियों की रिपोर्ट आने पर वे जाने कितने लोगों को कोरोना को प्रसाद की तरह बांट चुके होंगे और प्रशासन की मुश्किलें तो बढेंगी ही साथ ही कई लोगों के जीवन को खतरा पैदा होने की 100 फीसद संभावना है।

ऐसे में विभाग को निर्धारित 72 घण्टे में रिपोर्ट उपलब्ध करवाने को सुनिश्चित करने की दरकार है। यदि किन्हीं कारणों से विभाग ऐसा नहीं कर पाता है तो रिपोर्ट आने तक ऐसे लोगों को जिनमें किसी भी तरह के लक्षण हों या जिनकी रिपोर्ट पेंडिंग हो, उन्हें रिपोर्ट आने तक घर में रहने हेतु निर्देशित करना चाहिए।

उपायुक्त कांगड़ा राकेश प्रजापति का कहना है कि मामला ध्यान में है। असल में जिला भर से कोरोना जांच के सैंपल मशीनों की क्षमता से अधिक हो गए हैं। मशीनें बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे सभी लोग जिन्होंने कोरोना जांच हेतु सैंपल दिया है, उनसे अपील की जाती है कि वे रिपोर्ट आने तक होम क्वारेंटीन ही रहें ताकि किसी तरह की समस्या न बढ़े।

 

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