Mid Day Meal: मिड-डे मील के रेट बढ़ाए केंद्र, स्कूलों में सीमित बजट में खाना बनाना हुआ मुश्किल

Mid Day Meal – प्रदेश के स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील के रेट बढ़ाने के लिए राजकीय टीजीटी कला संघ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को ज्ञापन भेजा है। मिड-डे मील के रेट पिछले तीन साल से नहीं बढ़ाए गए हैं और बढ़ती मंहगाई से मिड-डे मील सीमित बजट में बनाना मुश्किल हो गया है।

Mid Day Meal
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मिड-डे मील के लिए प्राथमिक स्तर पर 4 रुपए 97 पैसे और मिडल स्तर के लिए 7 रुपए 45 पैसे का बजट तय किया गया था। लॉकडाउन के चलते स्कूल बंद रहे और मिड-डे मील स्कूलों में पकाने की नौबत न आई। ऐसे में मिड-डे मील की डाइट मनी राशि बच्चों के बैंक खातों में डाली जाती रही और मिड-डे मील के रेट बढ़ाने पर भी ध्यान नहीं गया। करीब डेढ़ साल स्कूल बंद रहे और मिड-डे मील स्कूलों में पकाना शुरू होने में करीब दो साल लग गए।

Mid Day Meal
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अब मिड-डे मील उस रेट में बनाना इसलिए मुश्किल है, क्योंकि खाद्य पदार्थों और गैस के दाम तीन साल में 25 से 35 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। अब एलपीजी की खपत अनुसार धनराशि नहीं मिल पा रही हैं और मिड-डे मील में अधिकांश खाद्य पदार्थ काफी महंगे हो गए हैं। ऐसे में मिड-डे मील के लिए प्राथमिक स्तर पर छह रुपए और मिडल स्तर के लिए नौ रुपए का बजट तय करने की मांग को टीजीटी कला संघ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय भेजा है।

संघ के प्रदेश महासचिव विजय हीर ने बताया कि मिड-डे मील योजना को प्री-प्राइमरी स्तर के लिए भी प्रदेश में लागू किया जाना आपेक्षित है, क्योंकि वर्तमान में प्रदेश के हजारों स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं चल रही हैं, जिनको बजट न होने पर भी मिड-डे मील खिलाना पड़ता है।

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