हिमाचल प्रदेश में ब्लैक फंगस से एक और मौत, आईजीएमसी में महिला मरीज ने तोड़ा दम

ब्लैक फंगस से आईजीएमसी में एक महिला मरीज की मौत हो गई है। महिला को नेरचौक मेडिकल कालेज से रैफर किया गया था। यहां पर महिला की मौत हो गई। आईजीएमसी में ब्लैक फंगस से मरने वाली यह तीसरी मरीज है। इसके अलावा राज्य में ब्लैक फंगस से अभी तक पांच मरीजों की मौत हो चुकी है।

दो की मौत टांडा मेडिकल कालेज है। ब्लैक फंगस लगातार हिमाचल में पांव पसारता जा रहा है। माना जा रहा है कि कोविड से रिकवर होने वाले मरीजों, जिन्हें शुगर की दिक्कत ज्यादा है, उन्हें ब्लैक फंगस होने का खतरा ज्यादा है।

आईजीएमसी अस्पताल के एमएस डा. जनकराज ने इसकी पुष्टि की है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के आईजीएमसी शिमला से दाखिल ब्लैक फंगस के मरीजों की जान बचाने के लिए चिकित्सकों को अब तक तीन मरीजों की एक-एक आंख तक निकालनी पड़ी है।

चिकित्सकों का कहना है कि ऐसा नहीं करने से मरीजों की हालत और गंभीर हो सकती थी। गौर हो कि आईजीएमसी अस्पताल में इस बीमारी से पीडि़त एक मरीज की गंभीर हालत होने के चलते उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। यह मरीज लगातार चिकित्सकों की निगरानी में है।

आईजीएमसी में मौजूदा समय में ब्लैक फंगस से पीडि़त सात मरीज भर्ती हैं। इनमें हमीरपुर के रहने वाले मरीजों की संख्या अधिक है। आईजीएमसी के ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नाक में दिक्कत, नाक बंद होना, दाग धब्बा और तालू में समस्या हो तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।

बताया जा रहा है कि आईजीएमसी में पांच मरीज हमीरपुर से हैं, जबकि सोलन के दो मरीज यहां पर उपचाराधीन हैं। जिन मरीजों की आंखें निकाली गई हैं, उनमें दो महिलाएं और एक पुरुष है।

इलाज के दौरान 300 से 400 तक बढ़ता है शुगर लेवल

बड़ी बात यह है कि मरीजों की सर्जरी करने से पहले जब चिकित्सक शुगर टेस्ट करते हैं, तो यह बढ़ा हुआ नजर आता है। इससे सर्जरी करना मुश्किल हो जाता है। इलाज के दौरान सामने आया है कि मरीजों का शुगर लेवल 300 से 400 तक बढ़ा हुआ था।

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