Himachal News: आज 18 अक्टूबर 2020 की 10 सबसे बड़ी खबरें

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धर्मशाला में बनेगा थ्रीजी मेगा एक्वेरियम, समुद्र में सैर करने जैसा होगा अहसास,

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बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा की नगरी धर्मशाला में आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को जल्द थ्र्रीजी मेगा एक्वेरियम में विभिन्न प्रकार के जलीय जीव, मछलियां और जलीय पौधे देखने को मिलेंगे। पर्यटकों को एक प्रकार से समुद्र में सैर करने जैसा एहसास होगा, क्योंकि राज्य सरकार का मत्स्य निदेशालय धर्मशाला में चैतडू़ के पास जल्द थ्रीजी मेगा एक्वेरियम का निर्माण करवाएगा। एक हेक्टेयर पर बनने वाले इस मछलीघर पर करीब 80 से 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस पारदर्शी एक्वेरियम में जलीय जीव और पौधे को रखे जाएंगे।

इस तरह से अब धर्मशाला की तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा की नगरी, एचपीसीए क्रिकेट स्टेडियम के अलावा विशाल थ्रीजी एक्वेरियम के रूप में भी बनने जा रही है। दलाईलामा का निवास स्थान होने के कारण धर्मशाला में दुनिया भर से पर्यटक आते हैं, उनके लिए भी यह एक्वेरियम आकर्षण का केंद्र होगा। इस थ्रीजी मेगा एक्वेरियम की स्थापना के लिए सरकार ने पीपीपी मोड पर फर्मों से ऑनलाइन आवेदन मांग लिए गए हैं।

थाईलैंड, यूके में हैं इस तरह के एक्वेरियम : सतपाल
हिमाचल प्रदेश के मत्स्य निदेशालय के निदेशक सतपाल मेहता के अनुसार पीपीपी मोड के तहत स्थापित किए जा रहे इस थ्रीजी मेगा एक्वेरियम के लिए 17 नवंबर तक ऑनलाइन एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रस्ट मांगे गए हैं। इन्हें मत्स्य पालन विभाग के बिलासपुर कार्यालय में जमा करवाना होगा। उन्होंने बताया कि इस तरह के एक्वेरियम थाईलैंड और यूके आदि में हैं। हालांकि जम्मू शहर में भी बहुत बड़ा अंडरग्राउंड एक्वेरियम है।

हिमाचल: नवंबर से कॉलेजों में बुलाए जाएंगे प्रैक्टिकल विषयों वाले विद्यार्थी,

 

हिमाचल में नवंबर से कॉलेजों को भी नियमित पढ़ाई के लिए खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। पहले चरण में प्रैक्टिकल विषयों वाले स्टूडेंट्स को कॉलेजों में बुलाया जाएगा। फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और भूगोल विषय पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की नवंबर से कक्षाएं लगाने की योजना तैयार हो गई है।




कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को लाकर सरकार की मंजूरी मिलते निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। फर्स्ट और सेकेंड ईयर के स्टूडेंट्स को प्रमोट करने का फैसला भी कैबिनेट बैठक में होगा। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं करवाने की संभावना अब बहुत कम है। प्रोविजनल आधार पर शिक्षा विभाग अगली कक्षाओं में विद्यार्थियों के दाखिले कर चुका है।

करीब डेढ़ माह से इनकी ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी है। ऐसे में अब शिक्षा विभाग सरकार को असेसमेंट के आधार पर ही इन विद्यार्थियों को अगली कक्षाओं में प्रमोट करने की सिफारिश करने का प्रस्ताव भेज रहा है। पहली नवंबर से यूजीसी के निर्देशानुसार डिग्री कॉलेजों में नया शैक्षणिक सत्र भी शुरू किया जाना है। ऐसे में परीक्षाएं करवाने की स्थिति में भी विश्वविद्यालय और शिक्षा विभाग नहीं है। विभाग ने सरकार को असेसमेंट का विकल्प भेजा है।




इसके तहत प्रमोट किए जाने वाले विद्यार्थियों की बीती कक्षा के परीक्षा परिणाम के 50 फीसदी अंकों, वर्तमान कक्षा की आंतरिक परीक्षाओं के 30 फीसदी अंकों और टीचर असेसमेंट के बीस फीसदी अंकों के आधार पर परिणाम तैयार करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत प्रमोट होने वाले विद्यार्थियों को अगले वर्ष अंक सुधार करने को परीक्षा देने का मौका देने का विकल्प भी तैयार किया गया है।

हिमाचल के डॉक्टर गौरव शर्मा न्यूजीलैंड में बने सांसद,

हिमाचल के जिला हमीरपुर के गलोड़ निवासी डॉ. गौरव शर्मा ने न्यूजीलैंड में सांसद बनकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। न्यूजीलैंड में शनिवार को घोषित हुए चुनाव परिणामों में डॉ. गौरव शर्मा ने हैमिल्टन वेस्ट सीट से लेबर पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की। डॉ. गौरव शर्मा को 15873 मत प्राप्त हुए जबकि इनके प्रतिद्वंद्वी नेशनल पार्टी के नेता टीम को 11487 वोट मिले।

डॉ. गौरव शर्मा अपने परिवार सहित कई साल पहले न्यूजीलैंड शिफ्ट हो गए हैं। उनके पिता हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड में सेवाएं दे चुके हैं। डॉ. गौरव शर्मा हिमाचल प्रदेश सरकार के पूर्व शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा के भांजे हैं। डॉ. गौरव इससे पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें जीत नसीब नहीं हुई थी।

एचपीयू में कुलपति की गाड़ी को घेरकर एबीवीपी ने किया प्रदर्शन, पुलिस के साथ धक्कामुक्की,

 

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) प्रशासन द्वारा पीजी प्रवेश परीक्षा न करवाने से भड़के एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने शनिवार को कुलपति का रास्ता रोककर प्रदर्शन किया। इससे कुछ देर तक एचपीयू में हंगामा होता रहा। वीसी की गाड़ी के आगे प्रदर्शन कर बातचीत करने की मांग कर रहे कार्यकर्ताओं को मौके पर मौजूद क्यूआरटी पुलिस जवानों ने जबरन उठाया और वहां से खदेड़कर गाड़ी के लिए रास्ता बनाया। इस दौरान पुलिस जवानों और कार्यकर्ताओं के बीच धक्कामुक्की भी हुई। इसमें प्रदर्शनकारी एबीवीपी कार्यकर्ताओं के कपड़े तक फट गए, कुछ हल्की चोटें भी आई हैं।




कार्यकर्ताओं ने इसके बाद कुलपति कार्यालय के गेट से अंदर घुसने का प्रयास किया लेकिन इसमें ताला लगा था। पुलिस ने यहां से कार्यकर्ताओं को खदेड़ा तो उन्होंने कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। दोपहर बाद फिर से कार्यकर्ता उग्र हो गए और पुलिस से उलझ पड़े। देर शाम तक एबीवीपी कार्यकर्ताओं का धरना जारी रहा।

जारी रहेगा धरना

एबीवीपी के प्रांत मंत्री राहुल राणा ने कहा कि जब तक कुलपति स्वयं आकर छात्र विरोधी फैसलों पर बात नहीं करते, तब तक एबीवीपी का यह धरना जारी रहेगा। राणा और विवि इकाई अध्यक्ष विशाल वर्मा ने आरोप लगाया कि कुलपति लगातार छात्र विरोधी फैसले ले रहे हैं। परिषद, पीजी प्रवेश परीक्षा के स्थान पर मेरिट आधार पर प्रवेश देने के फैसले का विरोध कर रहे थे। एबीवीपी ने कुलपति की गाड़ी रोककर छात्रों से जुड़े मुद्दों पर बात करनी चाही लेकिन पुलिस को बुलाकर कार्यकर्ताओं को वहां से उठवा दिया। इस दौरान जवानों ने कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया और उनके साथ मारपीट भी की। विशाल का आरोप है कि उनके कार्यकर्ताओं के कपड़े तक फाड़ दिए, कार्यकर्ताओं को घसीटा गया जिससे उन्हें चोटें भी आई हैं।

हिमाचल: तंगलंग दर्रे पर 15134 फीट ऊंचाई पर बनेगी विश्व की सबसे लंबी रेल टनल,

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति-लेह से सटे तंगलंग दर्रे को भेदकर 15134 फीट की ऊंचाई पर विश्व की सबसे लंबी रेल टनल बनेगी। सामरिक बिलासपुर-लेह रेल ट्रैक के लिए रोहतांग के बाद अब तंगलंग में 10.5 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण होगा। उत्तर रेलवे के टीम परियोजना निदेशक ने तुर्की और आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों के साथ स्पॉट विजिट किया। हालांकि अभी तक इस ऊंचाई पर सवा किलोमीटर लंबी रेल टनल बनाने का रिकॉर्ड चीन की क्यूटीआर रेलवे के नाम है।




बता दें कि 475 किमी लंबे लेह ट्रैक का 51 फीसदी हिस्सा टनलों में ही गुजरेगा। परियोजना निदेशक की अगुवाई में उत्तर रेलवे की टीम रेललाइन के रिफाइन सर्वे के लिए लेह पहुंची है। आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ, यूक्सेल तुर्की के जियोलॉजिस्ट और अलाइनमेंट इंजीनियर भी सर्वे टीम में शामिल हैं। टीम ने 15 अक्तूबर को तंगलंग दर्रे पर सुरंग के उत्तरी छोर का निरीक्षण किया। सर्वे के बाद इस प्रोजेक्ट की फाइनल लागत रिपोर्ट तैयार होगी।

यह टनल 4613 मीटर की ऊंचाई पर बनने वाली विश्व की सबसे लंबी रेल टनल होगी। इस सुरंग के बनने के बाद विश्व में सबसे ज्यादा ऊंचाई पर लंबी रेल टनल बनाने का रिकॉर्ड उत्तर रेलवे के नाम हो जाएगा। परियोजना निदेशक हरपाल सिंह ने बताया कि तंगलंग दर्रे पर उत्तर रेलवे सबसे ज्यादा ऊंचाई पर विश्व की सबसे लंबी रेल टनल बनाएगा। जिसका उन्होंने निरीक्षण भी किया।




हालांकि इससे करीब 300 मीटर ज्यादा ऊंचाई पर चीन के क्यूटीआर रेलवे ने सवा किलोमीटर फेंघुओशन रेल टनल बनाकर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर रखा है। उन्होंने कहा कि सर्वे के बाद इस प्रोजेक्ट की फाइनल लागत रिपोर्ट तैयार होगी। परियोजना निदेशक हरपाल सिंह ने बताया कि वह अपनी टीम के साथ 22 अक्तूबर तक रिफाइन सर्वे करेंगे। टीम ने सीपीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के साथ बैठक की है। लेह के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी रिव्यू बैठक की जाएगी। 22 अक्तूबर को टीम दिल्ली लौटेगी।

unlock 6.0: कार्यक्रम में शर्तों के साथ शामिल हो सकेंगे 200 से ज्यादा लोग

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केंद्र सरकार की ओर से जारी अनलॉक-6 की नई गाइडलाइंस के बाद शुक्रवार को हिमाचल के राज्य आपदा प्रबंधन सेल ने भी आदेश जारी कर दिए हैं। नए आदेशों के तहत प्रदेश भर में कुछ शर्तों के साथ सामाजिक, शैक्षिक, खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक और अन्य तरह के कार्यक्रमों को मंजूरी दे दी है। आपदा प्रबंधन सेल के आदेश अनुसार बंद जगहों पर निर्धारित क्षमता से 50 फीसदी और अधिकतम 200 लोगों के एक साथ किसी कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति होगी।

खुले स्थानों पर जगह की क्षमता के अनुसार 200 लोगों से ज्यादा लोग आ सकेंगे। आदेश में कुछ प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने की सलाह भी दी गई है। कार्यक्रम स्थल के आसपास थर्मल स्क्रीनिंग, सामाजिक दूरी व सैनिटाइजेशन की व्यवस्था होनी चाहिए। कई दिन या हफ्तों चलने वाले कार्यक्रम के दौरान उस समय को चिह्नित करना होगा, जब भीड़ ज्यादा होती है, ताकि उस समय भीड़ को नियंत्रित कर सामाजिक दूरी और लगातार सैनिटाइजेशन सुनिश्चित किया जा सके।

सियासी कार्यक्रमों में भी निर्धारित क्षमता से ज्यादा लोगों की भीड़ इकट्ठा नहीं होना सुनिश्चित करना होगा। मेले, पूजा पंडाल, रामलीला और नाटक आदि के दौरान सामाजिक दूरी कम करने के उद्देश्य से लोगों की कम से कम मौजूदगी रखने को कहा है। वालंटियरों की जगह-जगह पर तैनाती की जाए, ताकि थर्मल स्कैनिंग और मास्क पहनना सुनिश्चित किया जा सके। प्लान में स्वास्थ्य सेवा का ध्यान रखा जाए और नजदीकी अस्पताल के साथ पहले ही संपर्क बनाया जाए।




पहले बनाएं प्लान, ताकि न हो नियमों का उल्लंघन
आदेश में कहा है कि कार्यक्रमों के आयोजन से पहले एक प्लान तैयार किया जाए, ताकि कार्यक्रम में नियमों का उल्लंघन न हो। कार्यक्रम स्थल पर सामान्य से ज्यादा एंट्री और एग्जिट प्वाइंट बनाए जाए, ताकि लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे। धार्मिक स्थलों में जाने के दौरान अपने जूते या चप्पल अपने वाहन के अंदर रखे जाने चाहिएं। अगर जरूरत पड़े तो अलग जगह पर ही उन्हें रखा जाए। मंदिरों में मूर्तियों या धार्मिक ग्रंथों को छूने की इजाजत नहीं होगी और योग, खेल या धार्मिक कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं या प्रतिभागियों को खुद के मैट या कपड़ा साथ लाना और ले जाना होगा।

बीमार व्यक्ति मिले तो तुरंत करें आइसोलेट
किसी भी कार्यक्रम स्थल के अंदर अगर कोई बीमार व्यक्ति मिलता है तो उसे तत्काल उसे वहीं बनाए आइसोलेटेड क्षेत्र में मास्क पहनाकर रखा जाएगा। साथ ही नजदीकी अस्पताल के डॉक्टर उसका चेकअप करने तक वहीं रखा जाए। अगर लक्षण दिखते हैं तो तुरंत ही राज्य या जिला हेल्पलाइन को इसकी सूचना दी जा सकती है।

पंचायत चुनाव तक डीसी न बदले सरकार, राज्य चुनाव आयोग ने लिखा पत्र

 

राज्य चुनाव आयोग ने हिमाचल सरकार को पत्र लिखकर जिलों के उपायुक्तों का स्थानांतरण न करने को कहा है। पत्र में कहा गया है कि चूंकि प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। साथ ही मतदाता सूचियों का काम भी प्रगति पर है, ऐसे में यथासंभव उपायुक्तों को न बदला जाए, ताकि चुनावी कार्य में बाधा न आए।




आयोग के इस पत्र के बाद प्रदेश सरकार की उस कसरत पर ब्रेक लग गया है, जिसमें इस महीने ही उपायुक्तों को बदलने की तैयारी की जा रही थी। उधर, आयोग के इस पत्र से उपायुक्त बनने के तलबगारों को भी झटका लग सकता है। हालांकि पत्र में सरकार से आयोग ने तबादला न करने की गुजारिश की है, ऐसे में सरकार पर निर्भर करेगा कि वह आयोग की गुजारिश माने या तबादले कर दे।

दरअसल, प्रदेशभर में साल के अंत तक स्थानीय चुनाव होने हैं। इन चुनाव को लेकर राज्य चुनाव आयोग के निर्देश पर कवायद भी शुरू हो चुकी है। वर्तमान में मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने का काम जोर-शोर से चल रहा है। माना जा रहा है कि आयोग जनवरी 2021 से पहले स्थानीय निकायों के नए प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया पूरी करा लेगा।

टास्क फोर्स बनाकर नई शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने की तैयारी : गोविंद

 

देश में स्वतंत्रता के बाद नई शिक्षा नीति के रूप में ऐसी शिक्षा नीति आई है, जोकि राष्ट्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्मारक राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर में हि.प्र. समाज शास्त्र सोसायटी के सौजन्य से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार को बतौर मुख्यातिथि संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय जीवन दर्शन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस शिक्षा नीति से मातृभाषा को बढ़ावा मिलेगा और अपनी भाषा में सोच-विचार करने से छात्रों का अधिक बौद्धिक विकास होगा। नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए टास्क फोर्स बनाकर इसे धरातल पर लागू करने की दिशा में कार्य जारी है।




उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के रोल मॉडल हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में तकनीक और सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से ई-पी.टी.एम. करके प्रदेश के स्कूलों में अध्ययनरत 92 फीसदी अभिभावकों से उन्होंने व्यक्तिगत संवाद किया है। उन्होंने इस सैमीनार में उपस्थित प्रतिभागियों को कोविड-19 से बचाव बारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शपथ दिलवाई। उन्होंने आग्रह किया कि स्कूल-कालेज खुलने पर स्थानीय स्तर पर ऐसी शपथ बनाई जाए जो कक्षाओं में विद्यॢथयों को दिलवाई जाए।

9वीं कक्षा से शुरू होना चाहिए समाज शास्त्र विषय : हंसराज

इससे पहले विधानसभा के उपाध्यक्ष हंसराज ने बतौर विशिष्टातिथि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि समाज शास्त्र विषय समाज को जानने-समझने का कारगर माध्यम है। उन्होंने कहा कि परिवार समाज की प्रथम इकाई है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है कि पहले वह सामाजिक प्राणी बने। उन्होंने शिक्षा मंत्री से मांग की कि प्रदेश के सभी महाविद्यालयों और स्कूलों में 9वीं कक्षा से समाज शास्त्र विषय को शुरू किया जाए। हमीरपुर के विधायक नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि ऐसे अकादमिक कार्यक्रमों में मंथन के बाद निकले निष्कर्ष विकास का आधार बनते हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का लाभ जहां छात्रों को मिलेगा, वहीं आगे चलकर ये छात्र देश के विकास में अपना योगदान देंगे।

परिवर्तन की प्रक्रिया निरंतर : सक्सेना

सैमीनार के बीज वक्ता डा. आर के. सक्सेना ने अपने बीज वक्तव्य में कहा कि समाज शास्त्र कहता है कि परिवर्तन की प्रक्रिया निरंतर है और परिवर्तन की इस सतत प्रक्रिया से विकास संभव है। इससे पूर्व महाविद्यालय की प्राचार्य डा. अंजू बत्ता सहगल ने कालेज में चल रहीं गतिविधियों की जानकारी दी। सैमीनार के आयोजक सचिव डा. अमरजीत लाल अत्री ने इस सैमीनार के परिपे्रक्ष्य पर प्रकाश डाला। समाज शास्त्र सोसायटी की अध्यक्ष डा. रुचि रमेश और महासचिव डा मोहिंद्र सलारिया ने समाज और समाज शास्त्र के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का विवरण रखा।

वोटर लिस्ट पर आई डेढ़ लाख आपत्तियां, सुधार के लिए आयोग ने दिया 21 तक समय,

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शिमला आने वाले समय में शहरी विकास एवं पंचायती राज संस्थाओं के प्रस्तावित चुनाव के लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। वोटर लिस्ट तैयार करने का काम लगभग पूरा हो चुका है। इस पर आपत्तियां व दावे मांगे गए थे और जानकारी के अनुसार एक लाख 43 हजार 815 लोगों ने प्रदेश भर में आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। इनकी आपत्तियां वोटर लिस्ट को लेकर हैं, जिसमें कहीं मतदाता का नाम दर्ज नहीं है, तो कहीं जिस मतदाता का नाम नहीं होना चाहिए, वे वहां दर्ज है। ऐसी कई तरह की आपत्तियां इससे संबंधित दर्ज की गई हैं, जिनके निपटारे के लिए राज्य चुनाव आयोग ने 21 अक्तूबर तक का समय दिया है। तब तक इनका निपटारा किया जाएगा और फिर भी निपटारा नहीं होगा, तो जिलाधीशों को दावे किए जा सकेंगे। स्थानीय निकाय की बात करें, तो सोलन जिला में वोटर लिस्ट पर 8358 लोगों ने अपनी आपत्तियां दर्ज की हैं।




शिमला में 2187 आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जहां सात शहरी निकाय हैं। सिरमौर में 3396 आपत्तियां आई हैं, जबकि यहां केवल तीन शहरी निकाय हैं। ऊना में छह शहरी निकायों की मतदाता सूची में 2006, मंडी में सात नगर निकाय हैं, वहां 975 लोगों ने आपत्तियां दर्ज की हैं। कुल्लू में 1678, कांगड़ा में आठ शहरी निकायों में 2249 आपत्तियां हैं। हमीरपुर में 2397, बिलासपुर में 444, चंबा में 1054 आपत्तियां आई हैं। शहरी निकायों में कुल 24744 आपत्तियां हैं। वहीं, मंडी की पंचायतों में 9602, लाहुल-स्पीति में 609, कुल्लू में 638, कांगड़ा में 1675, सिरमौर में 5837 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। सोलन में 6772 तथा हमीरपुर में 10436 आपत्तियां लोगों ने मतदाता सूचियों पर दर्ज की हैं, जिनका निपटारा किया जाना जरूरी है।

मतदाता सूचियों के 40 पेज छपेंगे

शहरी निकाय व पंचायती राज के चुनाव के लिए मतदाता सूचियों के कुल 40 लाख पेज छापे जाएंगे। 54 पैसे प्रति पेज के हिसाब से चंडीगढ़ की एक फर्म को इसका कांट्रैक्ट दिया गया है। बता दें कि हर वार्ड की 20 कॉपी प्रिंट करवाई जाएंगी और प्रदेश में 23 हजार वार्ड, समितियों के तथा पंचायतों के वार्ड होंगे। एक पेज पर 36 वोटर दर्ज किए जाएंगे, जिनके फोटो भी साथ रहेंगे। इस पर सरकार 22 लाख रुपए की राशि खर्च करेगी। राज्य चुनाव आयोग के लीगल ऑफिसर संजीव महाजन के अनुसार मतदाता सूचियों को फाइनल करने का काम चल रहा है। आपत्तियां दूर होते ही वोटर लिस्ट को छाप दिया जाएगा।

रैली में ही आइसोलेट होंगे कोरोना पॉजिटिव, अब आयोजन स्थल पर आइसोलेशन रूम अनिवार्य

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नई एसओपी के आधार पर अब आयोजन स्थल में रैलियों के दौरान आइसोलेशन रूम स्थापित करना अनिवार्य होगा। इस दौरान यदि किसी भी व्यक्ति में कोविड लक्षण पाए जाते हैं, तो ऐसी स्थिति के लिए समर्पित आइसोलेशन कमरे का प्रावधान करना होगा। इस आधार पर ही रैलियां आयोजित होंगी। पार्किंग स्थल, प्रतिक्षा क्षेत्र, स्टॉल और भोजनालय आदि स्थानों के भीतर और बाहर परिसर में उचित भीड़ प्रबंधन होना चाहिए।

राजनीतिक और अन्य रैलियों तथा विसर्जन यात्राओं में लोगों की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए और ऐसे मामलों में उचित शारीरिक दूरी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस प्रकार की रैलियों की संख्या और उनके द्वारा तय की गई दूरी को इस प्रकार रखी जाए, ताकि वहां उचित व्यवस्था बनाई जा सके। आने जाने के रास्ते की योजना, विसर्जन स्थलों की पहचान, शामिल होने वाले लोगों की संख्या सुनिश्चित करना, शारीरिक दूरी आदि की योजना पहले से बनाई जानी चाहिए और अपनाए जाने वाले उपायों के संबंध में बताया जाना चाहिए।



सभी कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा के लिए नजदीक के अस्पतालों के साथ संपर्क कर चिकित्सा देखभाल की व्यवस्था की योजना बनानी चाहिए। परिसरों के अंदर और सार्वजनिक स्थलों में प्रभावी और नियमित स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

इनमें शौचालय, पानी पीने और हाथ धोने के स्थान और लगातार छूई जाने वाली सतहों जैसे लिफ्ट बटन, हैंड्रिल, कतार बैरिकेड, सीटें, बैंच, वॉशरूम आदि शामिल हैं। एसओपी में कहा गया है कि धार्मिक स्थानों में मूर्तियों, पवित्र पुस्तकों आदि को छूने की अनुमति नहीं होगी और भक्तों को कतार में सामाजिक दूरी के नियम का पालन करना चाहिए। कोविड-19 संदिग्ध होने की स्थिति में मानक संचालक प्रक्रिया में प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना भी शामिल है।





त्योहार स्थल और उसके आसपास यदि कोई बीमार व्यक्ति पाया जाता है तो उसे तुरंत आइसोलेशन कक्ष में ले जाना सुनिश्चत करें और यदि कोविड-19 लक्षण पाए जाते हैं तो नजदीक में चिकित्सा सुविधा के लिए सूचित करें या राज्य जिला हैल्पलाइन पर कॉल करें।

 

सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आयोजकों को अनुमति देते समय इन मानक संचालन प्रक्त्रियाओं का कड़ाई से क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। आपदा जोखिम न्यूनीकरण स्वयंसेवकों और आईएजी नेटवर्क का उपयोग करने के लिए जनता को शिक्षित करने और इन उपायों को लागू करने के लिए किया जा सकता है। स्थानीय प्रशासन कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए, जो उपयुक्त हों अतिरिक्त शर्तें लगा सकता है।

कंटेनमेंट जोन में लागू नहीं होगी नई एसओपी, अनलॉक-5 प्रदेश सरकार ने जारी किए आदेश

 

शिमला-अनलॉक-5 की जारी एसओपी कंटेनमेंट जोन में प्रतिबंधित रहेगी। इसके अलावा 65 वर्ष से अधिक आयु वाले या अन्य बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों को घर पर ही रहना होगा। इस श्रेणी में शामिल बच्चों व बुजुर्गों को बड़े आयोजनों में न जाने का परामर्श दिया गया है। त्योहारों के आगामी सीजन के दौरान विभिन्न गतिविधियों के संचालन के कारण सरकार ने बंद स्थानों पर अब लोगों के इकट्ठा होने की सीमा को 200 तक बढ़ाने की अनुमति दे दी है।

खुले स्थानों पर 50 प्रतिशत सभा की अनुमति होगी। फेस मास्क पहनना, थर्मल स्कैनिंग, हाथ धोना या सेनेटाइजर के उपयोग तथा शारीरिक दूरी को बनाए रखना ऐसे स्थानों में अनिवार्य किया जाएगा। खुले स्थानों में आयोजित होने वाली

सभाओं में 200 से अधिक व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। आयोजक, संगठनात्मक कर्मचारी यह सुनिश्चित करें कि त्योहार में जाने वाले व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर कम से कम छह फीट की दूरी बनाए रखें। ‘श्वसन शिष्टाचार’ का सख्ती से पालन किया जाए, जिसमें रूमाल/टिशू/फ्लेक्स एल्बो का इस्तेमाल तथा प्रयोग किए गए टिशू को सावधानीपूर्वक नष्ट करने का सख्ती से अनुपालन शामिल है।



वहीं, सार्वजनिक स्थानों पर थूकना वर्जित रहेगा। इसके साथ ही कंटेनमेंट जोन में किसी भी सामाजिक, शैक्षणिक, खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक, धार्मिक और अन्य उत्सवों की अनुमति नहीं दी जाएगी। कंटेनमेंट जोन से आने वाले आयोजकों/ कर्मचारियों और आगंतुकों को किसी भी उत्सव में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कंटेनमेंट जोन से संबंधित लोगों को घर पर ही रहकर सभी उत्सवों को मनाने और घर से बाहर न निकलने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।




थिएटर, सिनेमा और नाटकों को अधिक टिकट काउंटर, अलग-अलग निकास और प्रवेश द्वार रखने की सलाह के साथ ही आयोजित करने की अनुमति होगी। कार्यक्रम आयोजकों, उद्योगपतियों को कांटैक्टलैस भुगतान के लिए उपयुक्त प्रावधान करने के लिए कहा जाएगा। इसके अलावा सभी स्थानों पर थर्मल स्कैनिंग, शारीरिक दूरी, फेस मास्क और उचित स्वच्छता की सुविधा सुनिश्चित करनी होगी।

 

सभी संबंधित हितधारकों के साथ, प्रत्येक गतिविधि के संचालन के बारे में योजना को पहले ही पूरी तरह से तैयार किया जाए। प्रदर्शनियों, मेलों, पंडालों, संगीत कार्यक्रमों और नाटकों जैसे कई दिनों या हफ्तों तक चलने वाले उत्सवों में निर्धारित संख्या में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं।




थर्मल स्कैनिंग और शारीरिक दूरी सुनिश्चित करने के लिए स्वयंसेवकों को उचित रूप से तैनात किया जाना चाहिए और सेनेटाइजर, थर्मल गन और फ्लोर मार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि संभव हो, तो क्लोज सर्किट कैमरे आदि से गतिविधियों पर नजर रखी जाए। कोविड-19 के निवारक उपायों पर क्या करें और क्या न करें बारे परामर्श, पोस्टर-स्टैंडीज,ऑडियो-विजुअल मीडिया को प्रत्येक आयोजन स्थल पर प्रमुखता से प्रसारित व प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

शिमला पहुंचा पंजाब की पराली का धुआं, तीन-चार दिन से हर तरफ छा रही धुंध, दिन में गर्मी

शिमला-पंजाब की पराली का धुआं राजधानी शिमला तक पहुंच गया है। हिल्सक्वीन शिमला में तीन-चार दिन से धुंध दिखाई दे रही है। हालांकि लोग इससे मौसम की करवट मान रहे हैं, मगर यह पूरी तरह मौसम की करवट नहीं है। शिमला में घिर रही धुंध में पंजाब में जलाई जा रही पराली का धुआं मिश्रित है, जो कुछ दिन से लगातार शिमला में देखा जा रहा है। प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों में मानसून के रुखसत होने के बाद से मौसम साफ बना हुआ है। राज्य के अधिकतर क्षेत्रों में दिन के समय लगातार चटक धूप खिल रही है। तेज धूप खिलने के चलते राज्य में लोगों को दिन के समय गर्मी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि न्यूनतम तापमान में उतार-चढ़ाव का क्रम जारी है।




बीते दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में भी गिरावट आंकी गई थी, लेकिन राजधानी शिमला सहित प्रदेश के अन्य जिलों में लगातार धुंध घिर रही है। लोग इससे मौसम में करवट मान रहे थे, मगर मौसम विभाग की मानें तो शिमला सहित राज्य के अन्य स्थानों पर घिर रही धुंध में पंजाब में जलाई जा रही पराली का धुआं भी शामिल है, जिसके चलते दिन के समय लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।

 

मौसम विभाग के निदेशक डा. मनमोहन सिंह ने बताया कि प्रदेश की राजधानी सहित प्रदेश के अन्य जिलों में घिर रही धुंध में पराली का धुआं भी शामिल है। इसके अलावा पेड़ों से गिर रही पोलन भी धुंध में मिश्रित हो रही है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के तहत राज्य में एक सप्ताह के दौरान मौसम साफ बना रहेगा। इस दौरान अनेक स्थानों पर धूप खिली रहेगी। इस अवधि के दौरान बारिश होने के कम ही आसार हैं। प्रदेश में एक सप्ताह तक पश्चिमी विक्षोभ के कोई संकेत नहीं है।

हिमाचली किसानों के लिए पंजाब की मंडियां बंद; अनाज लेने से इनकार, प्रदेश में कोई मंडी नहीं

केंद्र सरकार के किसानों को अपनी फसल कहीं भी बेचने के किए जा रहे दावों के बीच हालात ये हैं कि हिमाचल के किसानों का अनाज पंजाब की मंडियों में बेचना तो दूर, मंडी के अंदर तक ले जाने नहीं दिया जा रहा है। हिमाचल में कहीं भी ऐसी अनाज मंडी नहीं है, जहां किसान अपना अनाज बेच सकें। ऐसे में अकसर किसान पड़ोसी राज्यों की मंडियों का रुख करते रहे हैं, लेकिन अब आलम यह है कि पंजाब की मंडियों ने हिमाचल के किसानों का अनाज लेने से साफ मना कर दिया है।




इसी से हताश नालागढ़ के किसानों मनजीत सिंह, धर्मपाल कौशिक, पद्मनाथ, राम सिंह, रामपाल, दयाल चंद, श्याम, सुरजीत सैणी, सुखदेव सिंह, नरेंद्र सैणी, चनण सैणी, बलवीर, रविंद्र सिंह सैणी, सज्जन सिंह, यादविंद्र सिंह, हाकम सिंह, ज्ञान सिंह, कृपाल का कहना है कि वे धान लेकर पंजाब की घनौली मंडी पहुंचे, तो उन्हें मंडी तक नहीं जाने दिया। साथ ही यह भी कह दिया कि वह हिमाचल के किसानों का अनाज नहीं खरीदेंगे। इसके बाद उन्होंने भट्टा साहिब की मंडी की ओर अपना रुख किया, लेकिन वहां भी उनके साथ ऐसा ही बर्ताव किया गया।

किसानों ने जब पंजाब की अन्य मंडियों के साथ संपर्क साधा, तो वहां भी हिमाचल के किसानों से अनाज लेने से मना कर दिया। भारतीय किसान संगठन के प्रदेशाध्यक्ष गोपाल चंद नेगी, सचिव जितेंद्र शर्मा, नालागढ़ मंडलाध्यक्ष जसविंद्र सैणी, बरोटीवाला इकाई के अध्यक्ष अनिल शर्मा, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रामलोक ठाकुर व निक्का राम आदि ने कहा कि एक तरफ तो केंद्र सरकार किसानों को कहीं भी अनाज बेचने की छूट देने की बात ऊंचे मंचों से कर रही है, लेकिन धरातल पर हालात ये हैं कि उनका अनाज साथ लगते राज्य पंजाब में भी नहीं बिक रहा है।

ऐसा भेदभाव क्यों

किसानों ने रोष जताया कि हिमाचल में आज तक कोई अनाज मंडी नहीं बन पाई है, जहां वे अपना अनाज बेच सकें। आखिर हिमाचल के किसानों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। किसानों ने रोष जताया कि यदि उनके साथ ऐसा ही दुखद बर्ताव किया जाता रहा, तो वह अनाज की बिजाई करना ही बंद कर देंगे, क्योंकि जब उनका अनाज बिकेगा ही नहीं, तो वे अनाज पैदा भी क्यों करेंगे। किसानों का कहना है कि इससे पूर्व भी वे अपना अनाज पड़ोसी राज्यों की मंडियों में ही बेचते आ रहे हैं, लेकिन अब अचानक उनका अनाज खरीदना बंद कर दिया गया है।

गोबिंदसागर झील पर बनेगा एक किलोमीटर लंबा आयरन ब्रिज, ब्रॉडगेज रेल लाइन के काम ने पकड़ी रफ्तार

बिलासपुर-भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन पर बिलासपुर शहर में गोबिंदसागर झील पर पिल्लरों पर नई तकनीक आधारित एक किलोमीटर लंबे आयरन ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। नई तकनीक आधारित यह ब्रिज अपने आप में एक आकर्षण होगा। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की ओर से 313 बीघा जमीन की एनओसी मिल गई है। खास बात यह है कि जिला की पंजाब से सटी सीमा से लेकर बिलासपुर शहर के बध्यात तक 52 किलोमीटर ट्रैक निर्माण के लिए चिन्हित जमीन का राजस्व रिकार्ड भी तैयार हो चुका है। अब बध्यात से आगे बैरी के लिए सर्वेक्षण के साथ-साथ राजस्व रिकॉर्ड तैयार करने का कार्य भी शुरू हो गया है।




बिलासपुर सदर के एसडीएम कम भूमि अधिग्रहण कलेक्टर रामेश्वर दास ने बताया कि यह ब्रॉडगेज रेलवे लाइन सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है और इस लाइन का कार्य तेज गति से चल रहा है। फोरेस्ट क्लीयरेंस भी मिल चुकी है, जबकि तीसरे चरण के सर्वे के तहत चिन्हित जमीन का केस बनकर तैयार है। उन्होंने बताया कि बिलासपुर शहर के बध्यात तक राजस्व रिकार्ड कंपलीट हो चुका है और अब इससे आगे बैरी के लिए चल रहे सर्वे के साथ-साथ राजस्व रिकॉर्ड तैयार करने का कार्य चलेगा। उन्होंने बताया कि रेलवे लाइन का प्रथम चरण 52 किलोमीटर का है। इसके तहत 1106 बीघा जमीन निजी है और 1694 बीघा जमीन सरकारी।

बिलासपुर शहर के बध्यात तक 2801 बीघा जमीन चिन्हित की गई है। उन्होंने बताया कि जकातखाना तक जमीन चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और ज्यादातर रेलवे लाइन प्रभावितों को मुआवजा जारी किया जा चुका है। हालांकि कुछेक गांव रह गए हैं, जहां लोगों को जल्द ही मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी। बिलासपुर के पास रघुनाथपुरा, लखनपुर, धौलरा, खैरियां, बामटा, बध्यात व लुहणू खैरियां में जमीन की नेगोसिएशन कर रहे हैं। शहर के वार्ड नंबर ग्यारह में 60 लाख रुपए बीघा के हिसाब से लोगों को जमीन का मुआवजा दिया गया है।




जकातखाना के कुछ गांवों में भी नेगोसिएशन में बाधाएं आई हैं, जिन्हें दूर किया जा रहा है। लोगों के साथ सामंजस्य बिठाकर इस कार्य के पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास भी किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस रेल लाईन की लंबाई बैरी तक 62.1 किलोमीटर है। प्रथम चरण में बिलासपुर तक 52 किलोमीटर रेललाइन का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए प्रक्रिया तेजी से चल रही है। 3.5 किलोमीटर लंबी सात टनल का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जबकि पांच ब्रिज के निर्माण के लिए टेंडर होने के बाद कार्य शुरू हुआ है। बिलासपुर शहर तक अगले चार साल में रेल ट्रैक निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है, जिसकी हर महीने 14 तारीख जिलाधीश राजेश्वर गोयल रिव्यू मीटिंग कर रहे हैं।

अब नया एक्ट हुआ लागू

एसडीएम रामेश्वर दास के अनुसार केंद्र सरकार ने लैंड एक्यूजिशन एक्ट 1894 की जगह अब राइट टू फेयर कंपनसेशन इन लैंड एक्यूजिशन (रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट) एक्ट लागू किया है। इस एक्ट के दायरे में आने वाले 16 गांवों में कंपल्सरी एक्यूजिशन की जा रही है। नए एक्ट में तय प्रावधानों के तहत 16 गांवों में चयनित की गई जमीन लोगों को इस प्रोजेक्ट के लिए देनी ही पड़ेगी। एसडीएम ने बताया कि स्पेशल सोशल इंपैक्ट असेस्मेंट के लिए दस्तावेज तैयार कर दिए हैं। सोलह गांवों में जब्बल, दगड़ाहण, भटेड़, टाली, कोट, तुन्नू, माणवां, रामपुर, खनसरा, रघुनाथपुरा, कोहलवीं, डियारा, खैरियां, लुहणू, बामटा, बैहल कंडेला और बध्यात शामिल हैं।

 

 

Author: admin

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